एक तरफ तो प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है ताकि युवा वर्ग नशों से दूर रहे और वहीं दूसरी ओर गांवों में स्थित खेल स्टेडियमों की अनदेखी कर ग्रामीण युवाओं में निराशा है। प्रदेश के अधिकतर गांवों में खेल स्टेडियम बदहाली पर आंसू बहाते दिखाई दे रहे है। फतेहपुर में बने पूंडरी कस्बे के स्टेडियम में भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
आबादी के हिसाब से हलके के बड़े गांवों में शुमार फरल गांव का खेल स्टेडियम जिला प्रशासन व ग्राम पंचायत की अनदेखी के कारण सिर्फ नाम का ही खेल स्टेडियम बन कर रह गया है। खिलाड़ी विक्की राणा, मोनू, रोहित, मनु, विपिन, मनोज, रविंद्र कुमार, समर राणा, राकेश, नरपाल, प्रदीप, साहिल, गगन, प्रकाश, अंकुश, नरेश, रजनीश, मोंटी, शिवचरण, संदीप, सुभाष, आशीष, पुष्पेंद्र, रजनीश, प्रिंस, आजाद, मेहूल व दीपक गुप्ता ने बताया कि स्टेडियम में न पीने का पानी, न कोच, न दौड़ने के लिए ट्रैक, न मुख्य गेट और न ही बास्केटबाल व हैंडबाल पोल हैं।
सबसे मुख्य समस्या तो स्टेडियम में पानी निकासी की है। थोड़ी सी बारिश होने पर ग्राउंड में पानी भर जाता है। जिस कारण उन्हें हफ्तों तक स्टेडियम से बाहर सड़कों पर ही व्यायाम व रेस लगानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि शनिवार को हुई बारिश से खेल ग्राउंड पानी से लबालब हो गया। स्टेडियम का मुख्य गेट न होने के कारण स्टेडियम में आवारा पशु घूमते रहते हैं। उन्होंने बताया कि खेल स्टेडियम को बने हुए लगभग 7 वर्ष हो चुके हैं मगर आज तक किसी खेल अधिकारी व पंचायत ने स्टेडियम में आने तक की जहमत नहीं उठाई।
खिलाड़ियों की जिला प्रशासन व सरकार से मांग है कि उनके गांव के खेल स्टेडियम की ओर ध्यान दिया जाए ताकि वे खेलों के माध्यम से अपना भविष्य सुरक्षित कर सके। इस मौके पर गांव के दर्जनों खिलाड़ी मौजूद रहे।