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अब तो सांस लेना भी हुआ मुश्किल

Tue, 08 Nov 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो कैथल
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नहीं रुक रहा पराली जलाने का सिलसिला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आंखों में जलन के बाद अब धूल व प्रदूषण के गुबार के कारण सांस लेने में भी परेशानी आने लगी है। शहर में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से दो अनाज मंडियों के कारण भी शहर के ऊपर प्रदूषण की चादर छाई हुई है। तीसरी अनाज मंडी को शहर से बाहर बनाए जाने का मामला सालों से लटका हुआ है। वहीं जिले में 300 से ज्यादा किसानों को पराली जलाने पर नोटिस दिए गए। बावजूद इसके अभी भी खेतों में पराली जलाए जा रहे हैं। उधर, प्रदूषण नियंत्रक विभाग की कार्यप्रणाली को इसी से समझा जा सकता है कि इनके पर तीन जिलों के लिए महज एक प्रदूषण मापक यंत्र है। इस कारण अभी तक कैथल का नंबर नहीं आया है।
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दिन भर छाया रहा धुएं, धूल का गुबार
सोमवार को सुबह एक बार धूप निकलने के बाद दोपहर के समय फिर से धूल, धुएं का गुबार छा गया। इसके बाद शाम तक यही स्थिति रही। शाम के समय तो लोगों की परेशानियां और बढ़ गईं। वहीं कई जगहों पर लोगों को सांस लेने में भी परेशानियां हुईं। विशेष रूप से अनाज मंडी के चारों ओर के इलाके में लोगों का जीना दूभर हो गया है। फिलहाल इस समस्या से निजात की उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है।

कई सालों से लटका है तीसरी अनाज मंडी का मामला
शहर को प्रदूषण व भीड़भाड़ से मुक्ति सहित अनाज डालने के लिए तीसरी अनाज मंडी का मामला कई सालों से लटका हुआ है। जिस कारण शहर में स्थित दो अनाज मंडियों में आने वाला धान ज्यादा रहता है। मंडी के अंदर धान डालने की जगह ना मिलने के कारण इसे बाहर सड़कों व खाली जगहों पर डाला जा रहा है। जहां साफ-सफाई में धूल व धान के कण पूरे शहर में फैल रहे हैं। नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश मित्तल ने कहा कि तीसरी अनाज मंडी का काम जल्द पूरा करवाया जाए। ताकि इस अनाज मंडी से बाहर अनाज ना डालने पड़े। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी। 300 से ज्यादा किसानों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद जिले में कई स्थानों पर अभी भी धान के अवशेष जलाए जा रहे हैं। जिस कारण पूरे जिले में धुएं की चादर बनी हुई है।
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कैथल का नंबर नहीं आया अभी मॉनिटरिंग में
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भिवानी कार्यालय के अंतर्गत कैथल आता है। जिसमें जींद जिला भी शामिल है। इन तीन जिलों में प्रदूषण की मॉनिटरिंग के लिए महज एक प्रदूषण मापक यंत्र है। जिस कारण प्रदूषण का स्तर मापने के लिए अभी तक कैथल का नंबर नहीं आया है। विभाग के एसडीओ अश्वनी कुमार ने कहा कि अभी केवल भिवानी का प्रदूषण का स्तर मापा गया है। कैथल में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई की जा रही है। कितना प्रदूषण है, यह अभी नहीं बताया जा सकता।

अब सांस लेना भी हुआ मुश्किल
शहरवासी रोहन मित्तल ने कहा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अब सांस लेना भी दूभर हो गया है। ना केवल किसानों पर पराल जलाने के लिए बल्कि शहर में भी धूल व धुआं छोड़ने वाले कार्यों पर कुछ दिनों के लिए रोक लगनी चाहिए। ताकि आसमान में जो धूल एकत्रित हो गई है, यह खत्म हो सके। लोगों को राहत मिल सके।

हो सकती हैं कई बीमारियां
शाह अस्पताल के डायरेक्टर डा. एमएस शाह ने कहा कि जिस तरह से प्रदूषण बढ़ रहा है। उससे आंखों में जलन, दमा, एलर्जी, नजला-जुकाम, आंखों की बीमारियां, गले में इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए लोग घरों में रहें। बाहर निकलें तो गीला कपड़ा, रुमाल रखें। हो सके तो मास्क का प्रयोग करें।

अगले एक-दो दिन तक ऐसा ही रहेगा मौसम
मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि सोमवार को अधिकतम 29 और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस है। अगले एक-दो दिनों तक इसी तरह का मौसम रहने का अनुमान है। एक बरसात होने पर ही यह समस्या हल हो सकती है।

पूरे जिले में मॉनिटरिंग की जा रही है। करीब 300 से ज्यादा किसानों को धान जलाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही काफी संख्या में किसानों पर जुर्माना भी किया गया है। इसके अलावा भी धुआं फैलाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। प्रयास किया जा रहा है कि बढ़ते प्रदूषण को रोका जा सके। इसमें जनता से भी अपील है कि वे खुद को स्वस्थ रखने के लिए प्रदूषण खत्म करने में सहयोग करें।
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रविप्रकाश गुप्ता, डीसी, कैथल।
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