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स्वच्छता अभियान के तहत स्मार्ट सिटी की दौड़ में कहां खड़ा है हम, दिल्ली से आई टीम ने की जांच

Thu, 12 Jan 2017 12:22 AM IST
ब्यूरो कैथल
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शहर की हालत देखकर दंग रह गई टीम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हमारा कैथल स्मार्ट सिटी की दौड़ में कहां खड़ा है यह जांचने शहरी विकास मंत्रालय नई दिल्ली की टीम शहर में थी। टीम ने शहर में सर्वे कर स्थिति जांची। हालांकि टीम के अधिकारी शहर में समस्याओं की स्थिति देखकर दंग रह गए। टीम तीन दिन के दौरे में शहर में आवश्यक जानकारी जुटाएगी। इसके बाद तय होगा कि कैथल में स्वच्छता अभियान की हालत क्या है। पहले दिन अधिकारियों ने शहर की कई बस्तियों का दौरा किया। जहां सीवरेज, शौचालय व खुले में शौच जैसी समस्याओं की जमीनी हकीकत की पड़ताल की। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन लोगों ने जो जानकारी टीम को दी, उसने सारी पोल खोलकर रख दी।
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टीम के अभियान की शुरुआत ही देरी से हुई। दिल्ली से पहुंची टीम सुबह नौ बजे कैथल पहुंची। लेकिन नगर परिषद अधिकारियों के इंतजार में टीम को आरकेएसडी कॉलेज में ही ग्यारह बज गए। इसके बाद टीम विभिन्न बस्तियों में गई। करीब साढ़े बारह बजे काम शुरू हो पाया। अधिकारी नानकपुरी कलोनी, हरिपुरा कलोनी, डेहा बस्ती, जांलधरी मौहल्ला, मेन बाजार व पुरानी सब्जी मंडी पहुंचे।

सबसे पहले नानकपुरी कॉलोनी स्थित सुभाष नगर में गलियों का दौरा कर सफाई व्यवस्था को देखा। यहां महिला मीना, मंगला देवी व बिमला रानी ने कहा कि अगर यहां सीवरेज ओवरफ्लो हो जाए तो कोई कर्मचारी इसे खेलकर देखने तक की जहमत तक नहीं उठाता। स्वच्छता अभियान तो चलाया  है, लेकिन सफाई कर्मचारी इसके तहत कार्य नहीं करते। नगर परिषद द्वारा डस्टबिन भी नहीं रखे गए। जिसमें वह कूड़ा डाल सके। कुतुबपुर रोड स्थित हरिनगर में लोगों ने कहा कि सफाई कर्मचारी लगातार गलियों की सफाई नहीं करते जिस कारण वे गंदगी में रहने को मजबूर हैं।
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अधिकारियों ने सर्वे रिपोर्ट के बारे में तो नहीं बताया। लेकिन यह कहा कि स्वच्छता अभियान के तहत यह सर्वे किया जा रहा है। शहर में तीन दिनों ग्राउंड लेवल पर हुए कार्य, कागजातों का ऑडिट सहित कई तरह की जानकारी हासिल की जानी है। शहर स्मार्ट सिटी बनने लायक हैं या नहीं इसके लिए जानकारी जुटाई जा रही है।

डेहा बस्ती में नहीं मिले शौचालय और सीवरेज व्यवस्था
टीम डेहा बस्ती में पहुंची तो उन्हें अजीब स्थिति देखने को मिली। टीम के सदस्यों ने देखा की अनाज मंडी के समीप स्थित बस्ती की गलियों में न तो कोई सीवरेज है और न ही किसी के घर में शौचालय बना हुआ था। रेलवे स्टेशन के सामने अस्थाई सार्वजनिक शौचालय को दिखा, जिसके बारे में लोगों ने कहा कि इसे अभी 10 दिन भी नहीं हुए हैं। बस्ती वासी बबली व बलदेव ने कहा कि यहां न तो सफाई कर्मचारी आते है न ही नगर परिषद के कर्मचारी उनकी बस्ती के लिए कोई सुधार करते हैं।

यहां सफाई नहीं होती
जालंधरी मोहल्ला में सुशील कुमार ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए नगर परिषद में वे सीवरेज की समस्या पर दस बार शिकायत दे चुके हैं। लेकिन उन्होंने इसे ठीक नहीं करवाया। टीम ने इस मोहल्ले की गलियों का दौरा किया तो यहां सीवरेज का पानी गलियों में बहता पाया गया। इसके अलावा सीवरेज को रेलवे लाइन के एक प्लाट में छोड़ा गया जहां सिर्फ गंदगी फैली थी।

शहर में ये मिलीं खामियां
शहरी विकास मंत्रालय से आए अधिकारी शहर में स्वच्छता संबंधी अभियान के कोई भी पोस्टर ना देखकर हैरान रह गए। इतना ही नहीं शहर में किसी भी इलाके को पूर्ण रूप से खुले से शौच मुक्त घोषित नहीं किया गया है। साथ ही खुले में शौच मुक्ति के लिए बनाए गए नारे या फिर पोस्टर कहीं नहीं लगे हुए मिले। शहर की बस्तियों में सीवरेज की हालत खस्ता मिली। साथ ही सार्वजनिक शौचालय नहीं मिले। जो हैं, उनकी हालत खस्ता थी। वहीं कालोनियों में डस्टबिन नहीं मिले। जहां लोग अपना कूड़ा डाल सकें। बस्तियों में सफाई व्यवस्था खस्ता हाल में मिलीं।

ऐसे मिलेंगे स्वच्छता के लिए अंक
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए देश के 500 शहर व प्रदेश के 20 शहरों को शामिल किया है। जिसमें 1000 अंक शहर में खुले में शौचमुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों, कूड़ा प्रबंधन, सूचना, व्यवहार, डोर टू डोर कूड़ा प्रबंधन, पब्लिक व कम्यूनिटी टॉयलेट, निजी टॉयलेट की सुविधा में से दिए जाने हैं। 600 अंक नागरिक भागेदारी, 500 अंक टीम द्वारा सर्वें के बाद दिया जाएंगे।
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ये अधिकारी रहे शामिल
दिल्ली से आई टीम में सीनियर ऑडिटर योगेंद्र कुमार, ऑडिटर बाबू लाल, अशोक कुमार शामिल थे।
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