कैथल। गांव नरड़ में बीते पांच वर्षों में काफी बदलाव हुआ है। यह नतीजा युवा सरपंच और पढ़ी लिखी पंचायत होने का है। अब फिर से पूरे गांव के चौक चौराहों, चौपाल, गली, मोहल्ले में युवा व बुजुर्ग चुनावों की ही चर्चा करते हैं। इस बार सरपंच पद के लिए छह महिलाओं के नाम फिलहाल चर्चा में हैं।
गौरतलब है कि जहां पांच वर्ष पहले पूरे गांव की गलियां कच्ची थीं, वहीं अब हर गली को पेवर ब्लॉक से बनाया गया है। इसके अलावा गांव के दोनों स्कूलों का जीर्णोद्धार व कई चौपालों पर मरम्मत का कार्य करवाया।
गांव नरड़ में 35 वर्ष पहले बना था सर्वसम्मति से सरपंच-पूर्व सरपंच प्रतिनिधि चांदी राम ने बताया कि लगभग 35 वर्ष पहले गांव नरड़ में सर्वसम्मति से धर्म सिंह को सरपंच बनाया था। जिसका कार्यकाल तीन वर्ष का था। मतदान के जरिए सबसे पहले सरपंच जागर सिंह बने थे। जो लगातार तीन बार रहे। अब गांव की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने बताया कि जितने विकास कार्य पिछले पांच साल में गांव में हुए है। अभी तक किसी पंचायत ने नहीं करवाए।
पांच वर्ष में ये हुए गांव नरड़ में विकास कार्य-गांव में पशु अस्पताल का निर्माण करवाया गया, दोनों सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार करवाया, कई आंगनबाड़ी भवन बनवाए, सभी जातियों की चौपालों का कार्य करवाया, नहरी पानी के लिए वाटर टैंक बनवाया, आंबेडकर भवन का निर्माण करवाया, पूरे गांव की गलियों का निर्माण करवाया, गांव से बरसाती पानी की निकासी करवाई, ढाब वाले तालाब में फाइव पौंड करवाया, पूरे गांव में स्ट्रीट लाइटें लगाई, पूरे गांव में पानी की पाइप लाइन बिछाई, गांव में मुख्य चौक चौराहों पर सीमेंट की कुर्सियां रखवाई, सभी चौपालों पर रंग रोगन करवाया, सभी आंगनबाड़ी में फर्नीचर रखवाया, अलग से एक महिला चौपाल का निर्माण करवाया, गांव नरड़ से सांपली खेड़ी की सडक़ का निर्माण करवाया। दोनों सरकारी स्कूलों का नाम ग्राम पंचायत द्वारा स्वतंत्रता सेनानी मनी राम गोयत के नाम पर रखवाया।
गांव नरड़ में छह प्रत्याशी हैं मैदान-अगर इस बार की बात करें तो अब तक गांव नरड़ में सरपंच पद के लिए दावा ठोकने वाले छह महिलाओं के नाम सामने आ रहे है। गांव में बिंदू रानी, ममता रानी, गीता, सुमन, नेहा व पूजा के नाम चर्चा में हैं। इनमें से कौन-कौन सी महिलाएं नामांकन फार्म भरती हैं, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। फिल्हाल गांव में सरपंच पद का चुनाव रोचक होता दिख रहा है। सभी अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।
गांव वासी सुभाष का कहना है कि लोकतंत्र के इस पर्व में महिलाओं की अहम भागीदारी है। वह सरपंच बनने के लिए गांव की युवतियों के लिए सिलाई सेंटर, गांव में गलियां, नालियां, चौपाल व गांव में एक पुस्तकालय बनवाने के कार्य कर सकती हैं। महिला विकास के लिए काम कर सकती हैं।
गांव वासी कुलदीप सिंह ने कहा कि गांव में काफी समस्याएं हैं। जिनसे आमजन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव की मुख्य समस्या गांव में नहर से आने वाली पेयजल की सप्लाई पूरे गांव में नहीं आ रही। जिस कारण से ग्रामीणों को दूर से पीने का पानी लेकर आना पड़ता है।