फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसरोवर तीर्थ के किनारे बसा पर मूलभूत सुविधाओं को भी तरसा

विज्ञापन
21-कैथल। ग्राम सचिवालय मानस का दृश्य - फोटो : Kaithal
विज्ञापन
कैथल। पिछले 10 वर्षों से अर्थात पंचायती राज चुनाव के दो कार्यकाल से हर बार दो-दो पंचायतों के सिर पर मेरे विकास की जिम्मेदारी आ रही है, लेकिन फिर भी मैं अपने क्षेत्र में बाशिंदों को अभी तक पूरी सुविधाएं नहीं दे पाया हूं। मेरी दो पंचायतों में 7500 के करीब आबादी को आज भी कई प्रकार की सुविधाओं की दरकार है। जी हां, मैं गांव मानस हूं। मानसरोवर तीर्थ के किनारे सैकड़ों वर्ष पहले से बसा हूं। अब तक दर्जनों पंचायतों का कार्यकाल आया और गया, लेकिन मैं हर बार उम्मीद लगाए रहता हूं कि इस बार मेरे बाशिंदों को पूर्ण सुविधाएं मिलेंगी। इस बार भी दर्जनों लोग दोनों पंचायतों के प्रतिनिधि बनने और मेरे विकास का दंभ भर रहे हैं।
विज्ञापन

गौरतलब है कि शहर से करीब सात किलोमीटर बसे गांव मानस में भाल पट्टी और मानस पट्टी की दो पंचायतें बनती हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव की साक्षरता दर इस समय 85 प्रतिशत से अधिक है। भाल पट्टी में जहां 2470 मतदाता हैं, वहीं मानस पट्टी में करीब 2060 मतदाता हैं। इस बार मानस पट्टी की पंचायत अनुसूचित जाति उम्मीदवार के लिए आरक्षित है, जबकि भाल पट्टी में सामान्य वर्ग सरपंच बनेगा। ग्रामीणों ने सरपंच पद के उम्मीदवारों से सभी सुविधाएं जुटाने की आस जताई है।
ग्रामीण सलिंद्र कुमार ने कहा कि भले ही गांव में अधिकतर गलियां पक्की हैं, लेकिन फिर भी गांव में सफाई का अभाव रहता है। ग्रामीण खेती और पशुपालन का कार्य करते हैं। पशुओं के कारण सड़कों पर रोजाना सफाई करने की जरूरत पड़ती है, लेकिन हो नहीं रही। सफाई न होना गांव की बड़ी समस्या है।
विज्ञापन

ग्रामीण व भावी सरपंच उम्मीदवार जसबीर सिंह ने बताया कि गांव में विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी की सुविधा भी नहीं है। कोचिंग और कंप्यूटर प्रशिक्षण सहित ट्यूशन के लिए विद्यार्थियों को शहर में जाना पड़ता है। अगर गांव में लाइब्रेरी बनाकर उसमें शिक्षकों व प्रशिक्षकों को लगाया जाए तो इससे गांव के विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा।
ग्रामीण ऋषिपाल ने बताया कि मानस से गांव अटेला की ओर जाने वाली सड़क को बनाने का कार्य तो शुरू कर दिया गया, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों को खेतों में जाने के लिए लंबे समय से पक्की सड़क बनने का इंतजार है। ये भी नहीं पता कि सड़क का कार्य पूरा कब होगा।
ग्रामीण बीराराम ने कहा कि गांव में खेल स्टेडियम और पार्क जैसी सुविधा भी नहीं है। गांव में काफी खिलाड़ी हैं, जिन्हें खेलने के लिए आसपास में खाली जगह तलाश करनी पड़ती है। भर्तियों की तैयारी करने वाले युवा सड़कों पर दौड़ लगाते हैं। गांव में अच्छा स्टेडियम बन जाए तो खिलाड़ियों को काफी फायदा होगा।
गांव के निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश ने बताया कि पिछली पंचायतों के कार्यकाल में गांव में काफी कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब गांव में ग्रामीणों की सुविधा से संबंधित जो कार्य बाकी हैं, भावी उम्मीदवार उनको प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाएं। गांववासी भी इस कार्य में पूरा सहयोग करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें