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धरना, प्रदर्शन और रैली लोकतंत्र की ऑक्सीजन हैं : कामरेड राजकुमार

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17 ढांड 01 कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कामरेड राजकुमार।
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ढांड। हरियाणा सरकार की ओर से सितंबर माह तक प्रदेश में धरना, प्रदर्शन और रैलियों पर रोक लगाने के आदेश की एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी के जिला सचिव कॉमरेड राजकुमार सारसा ने मीटिंग के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसे अलोकतांत्रिक, न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के विपरीत और लोकतंत्र का गला घोंटने वाला फैसला बताया है।उन्होंने कहा कि धरना, प्रदर्शन और रैली लोकतंत्र की ऑक्सीजन हैं। सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण आम जनता की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं लेकिन उनका समाधान करने के बजाय सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने इस फैसले को फासिस्ट और तानाशाही कदम बताते हुए कहा कि इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने सरकार से मांग की है कि वह इस आदेश को तुरंत वापस लें और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करे। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो इस फैसले के विरोध में व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
पार्टी ने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिकों और आम जनता से भी इस फैसले के खिलाफ आगे आने और आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया है। एसयूसीआई की ओर से सरकार के इस कदम को अघोषित इमरजेंसी करार दिया गया है।
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इसके साथ ही एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमले की भी आलोचना की। पार्टी का आरोप है कि हरियाणा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की आड़ लेकर यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान की संप्रभुता पर हुए हमलों के खिलाफ भारत सरकार ने कोई ठोस प्रतिवाद नहीं किया। पार्टी ने देशवासियों से इस मुद्दे पर भी आवाज उठाने का आह्वान किया है।

17 ढांड 01 कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कामरेड राजकुमार।

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