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Kaithal News: छोटी काशी के नाम से है प्रसिद्ध है श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर

Fri, 08 Mar 2024 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। चंदाना गेट स्थित प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर आस्था का केंद्र है। यह छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर का इतिहास महाभारत के युद्ध से जुड़ा है। किंवदंती के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 11 रुद्रों की स्थापना कर पांडवों से पूजा करवाई थी। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जा रही है।

मंदिर के पुजारी पंडित मुनेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर की मान्यता है कि श्री ग्यारह रुद्री मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय की थी, जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्री कृष्ण ने कौरव और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए पूजा करवाई व ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी। ऐसा भी माना जाता है कि महाभारत के समय अर्जुन ने मिश्रा पाशुपत अस्त्र प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी और भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर अर्जुन को दर्शन दिए थे। तभी से आसपास के श्रद्धालु यहां पूजा करने लगे।
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मंदिर की देखरेख के लिए बनाई गई कमेटी महाशिवरात्रि के पर्व पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है। महाशिवरात्रि के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राम नवमी, दशहरा व दीपावली आदि मुख्य पर्वों पर मंदिर को बेहतरीन ढंग सजाया जाता है। इन त्योहारों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं। दशहरे से पहले मंदिर में स्थापित मंच पर श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब की ओर से रामलीला का मंचन किया जाता है। श्रद्धालु ग्यारह रुद्रों पर दूध और मिश्री के साथ अभिषेक करते हैं। सावन में आने वाली शिवरात्रि पर मंदिर में भक्त कांवड़ लाते हैं और समय-समय पर विभिन्न कथाओं का आयोजन किया जाता है।
महर्षि कश्यप ने भी मांगा था भगवान शिव से वरदान

पंडित मुनेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर का इतिहास महर्षि कश्यप से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। दरअसल, महर्षि कश्यप ने भगवान शिव की तपस्या करके वरदान मांगा था कि भगवान शिव उनके पुत्र के रूप में जन्म लें। भगवान ने गाय माता के पेट से 11 रूपों में जन्म लिया इसलिए इन्हें सुरभि पुत्र भी कहते हैं। इन रुद्रों के नाम विलोहित, शास्ता, कपाली, पिंगल, अजपाद, अहिबरुध्न्य, भीम, विरूपाक्ष चंड भव व शंभु हैं।
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मंदिर समिति के प्रधान विनोद मित्तल ने बताया कि शिव पुराण में लिखा है कि जो भी महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के ग्यारह रुद्रों पर जल चढ़ता है, उसकी मनोकामना पूर्ति होती है और उसके सारे पाप धुलकर हजार गाय दान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। मंदिर में राम दरबार, माता दुर्गा, वैष्णो माता, राधा-कृष्ण मंदिर, महाकाली मंदिर, नवग्रह और राधे मंदिर की छटा देखते बनती हैं।
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