अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शिक्षा के क्षेत्र में जिले में वर्ष 2016 में कोई बड़ा मुकाम हासिल नहीं हो पाया। सरकारी स्कूलों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। बल्कि पांच स्कूल दूसरे स्कूलों में समायोजित किए गए। लड़कियों के लिए कस्तूरबा गांधी स्कूल जरूर गांव सजूमा में शुरू हो पाया। इसके अलावा वार्षिक परीक्षा परिणामों में जिले के सरकारी स्कूलों की कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई। कक्षा दसवीं का परीक्षा परिणाम जहां 35 प्रतिशत से भी कम रहा है वहीं कक्षा बारहवीं का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत के आस-पास रहा है।
नहीं खुले नए स्कूल, पांच को किया गया मर्ज
वर्ष 2016 में जिले में कोई नया स्कूल नहीं खुला है। बल्कि पांच से अधिक स्कूलों को मर्ज कर दिया है। शहर वासियों की शहर की कई कॉलोनियों में स्कूल खोलने की मांग है। विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में करीब तीन से पांच किलोमीटर तक का सफर तय करके स्कूल आना पड़ रहा है। इसी साल एक बच्चे की नेशनल हाइवे पर एक वाहन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
यह है जिले में स्कूलों की स्थिति
जिले में कुल 599 सरकारी स्कूल है। जिसमें कक्षा दसवीं व बाहरवीं में 149 स्कूल है ओर आठवीं तक के 77 स्कूल हैं और 373 स्कूल प्राइमरी तक के हैं। जिले में केवल एक ही राजकीय जाखौली अड्डा स्कूल करीब आठ साल पहले खुला था। उसके बाद एक स्कूल प्राइमरी स्कूल हरसोला बस्ती में खुला है।
परीक्षा परिणाम में भी निराशा
कैथल के कक्षा दसवीं व बारहवीं के परीक्षा परिणामों ने विद्यार्थियों को खूब रुलाया है। कक्षा दसवीं का परीक्षा परिणाम जहां 35 प्रतिशत से भी कम रहा था। वहीं कक्षा बारहवीं का परीक्षा परिणाम करीब 50 प्रतिशत ही था। सरकारी स्कूलों में कक्षा दसवीं के विद्यार्थी 20 प्रतिशत तक पास न होने पर उनकी छुट्टियों में भी कक्षाएं लगी थी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों रहा दबदबा
जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खूब दबदबा रहा है। जिला सांस्कृतिक संयोजक सुशील कुमार ने बताया कि फोक डांस में राष्ट्रीय स्तरीय बाल रंग प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया है। यह प्रतियोगिता भोपाल में हुई थी। जिसमें विद्यार्थियों ने 25 स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके अलावा हरियाणवी फोक डांस में ही ओएसडीएवी स्कूल के विद्यार्थियों ने लगातार तीसरी बार गवर्नर से अवार्ड हासिल किया है।
अतिथि अध्यापकों व कंप्यूटर टीचर्स का भी छाया रहा मामला
साल भर कंप्यूटर टीचर्स का मामला छाया रहा। वहीं इसी साल शिक्षामंत्री ने अपने आश्वासन के अनुसार अतिथि अध्यापकों की ज्वाइनिंग भी करवाई। सितंबर माह में अतिथि अध्यापकों ने ज्वाइन किया। जिससे काफी लोगों को राहत मिली थी। हालांकि कंप्यूटर टीचर्स की समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
गांव शेरगढ़ में बनकर तैयार हो चुके पॉलिटेक्निक कॉलेज का भवन खाली पड़ा खराब हो रहा है। यहां अभी तक भी कक्षाएं लगना शुरू नहीं हुई हैं। यहां से बच्चों को अभी भी कक्षाएं लगाने के लिए गुहला-चीका जाना पड़ता है। विभाग इसके लिए बिना शुरू हुए ही बिजली का बिल भर रहा है।
जिले में केवल एक ही कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल खुला है। यह एक आवासीय स्कूल है। इसके अलावा कुछ स्कूल मर्ज किए गए हैं।
शमशेर सिरोही, उप जिला शिक्षा अधिकारी