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Kaithal News: सवार्थ सिद्धि योग मंे 19 वर्षों के बाद शिवरात्रि पर्व

Thu, 01 Aug 2024 05:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। इस बार सावन शिवरात्रि का पर्व दो अगस्त को सवार्थ सिद्धि योग में बना है। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 19 साल बाद सावन की शिवरात्रि शुभ नक्षत्र में आ रही है।

उन्होंने बताया कि इसी नक्षत्र और एक ही तारीख में सावन शिवरात्रि साल 2005 में मनाई गई थी। इस साल सावन शिवरात्रि का आगमन दो अगस्त को आद्रा नक्षत्र में हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सावन की शिवरात्रि के दिन आद्रा नक्षत्र होने से शिव भक्तों को विशेष लाभ होगा।
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शांडिल्य ने कहा कि शिवरात्रि पर भद्रावास योग भी बनेगा। इस दौरान भद्रा स्वर्ग में ही वास करेंगी। भद्रावास योग दो अगस्त की दोपहर तीन बजकर 26 मिनट पर शुरू हो रहा है। माना जाता है कि भद्रा के स्वर्ग और पाताल में रहने पर पृथ्वी पर रहने वाले जीवों का कल्याण हो जाता है।

शांडिल्य ने कहा कि सावन शिवरात्रि का दिन शिव पूजा के लिए उत्तम है। सूर्योदय के बाद कभी भी शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं। यदि सर्वार्थ सिद्धि योग में जलाभिषेक किया जाए तो तो उत्तम फल की प्राप्ति होती है। सर्वार्थ सिद्धि योग में आप जिस मनोकामना के साथ शिव जी का जलाभिषेक करेंगे, उसके पूर्ण होने की उम्मीद अधिक रहेगी। ऐसे में सुबह 10:59 से कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

शांडिल्य ने कहा कि शिव भक्तों के लिए सावन शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के समान ही होता है। दरअसल सावन का महीना भगवान शिव को प्रिय है और शिवरात्रि अर्थात इस माह की चतुर्दशी तिथि के प्रतिनिधि देव भगवान शंकर हैं। ऐसे में माह और तिथि दोनों शिव पूजा के लिए उत्तम है। सावन माह में रुद्राभिषेक का भी विशेष महत्व है। इस पूरे माह शिववास हर दिन होता है।
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सावन के अतिरिक्त अन्य महीनों में आप किसी भी दिन रुद्राभिषेक नहीं करा सकते हैं। उसके लिए आपको शिववास देखना पड़ता है। इसी लिए सावन शिवरात्रि का दिन रुद्राभिषेक के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से रुद्राभिषेक किया जाए तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
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