कैथल। पुलिस अधीक्षक मनप्रीत सिंह सूदन ने कहा कि डिजिटल युग में सुविधा के नाम पर लापरवाही बढ़ती जा रही है। लोग बैंक कार्य, नौकरी आवेदन, लोन प्रोसेस या पहचान सत्यापन के बहाने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक, मार्कशीट व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मोबाइल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी के भी साथ आसानी से साझा कर देते हैं। उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि ऑनलाइन दस्तावेज साझा करना साइबर अपराधियों को अवसर प्रदान करता है और इसका दुरुपयोग कर वे व्यक्ति को बड़ी ठगी का शिकार बना सकते हैं।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, निजी कंपनी प्रतिनिधि, जॉब कंसल्टेंट या लोन एजेंट बताकर संपर्क करते हैं। शुरुआत में ये लोग विश्वास जीतते हैं और फिर केवाईसी अपडेट, लोन स्वीकृति, नौकरी प्रक्रिया, इनाम वितरण या सरकारी योजना का लाभ दिलाने का बहाना देकर दस्तावेज मांग लेते हैं। कई बार नकली वेबसाइट या फॉर्म लिंक भेजकर भी दस्तावेज अपलोड करवाए जाते हैं। लोग बिना पुष्टि के दस्तावेज भेज देते हैं और बाद में उन्हीं की पहचान का इस्तेमाल सिम कार्ड जारी करने, बैंक खाते खुलवाने, लोन लेने, अवैध लेनदेन करने या आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है।