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शरद पूर्णिमा आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का पर्व : संत छवि रामदास

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संत छवि रामदास
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सीवन। संत छवि रामदास ने कहा कि शरद पूर्णिमा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती है। यह पर्व मनुष्य को आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और जीवन में शांति बनाए रखने की प्रेरणा देता है। शरद पूर्णिमा की उज्ज्वल चांदनी प्रकृति की सुंदरता के साथ प्रेम, सद्भाव और उल्लास का संदेश भी देती है। संत छवि रामदास ने कहा कि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य केवल परंपराओं का निर्वहन करना नहीं बल्कि उनके माध्यम से जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाना भी है। मनुष्य को अपने व्यवहार में विनम्रता रखनी चाहिए और दूसरों के प्रति दया, सहयोग और सम्मान की भावना बनाए रखनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना भी धर्म के मूल सिद्धांतों में शामिल है। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा का अवसर व्यक्ति को अपने विचारों और आचरण पर चिंतन करने की प्रेरणा देता है। ईश्वर का स्मरण करने के साथ हमें अपने जीवन में सत्य, सेवा और परोपकार को महत्व देना चाहिए। समाज में प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। इस अवसर पर बलराज बंसल, जोग ध्यान बंसल, मास्टर प्रवेश सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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