संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। मरीजों को अच्छी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इससे मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। अस्पताल में वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन चलाने के लिए ऑपरेटर नहीं है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
इस समय अस्पताल में सात वेंटिलेटर है, लेकिन इचलाने के लिए एक भी ऑपरेटर नहीं है। इन वेंटिलेटर को केवल आपातकालीन स्थिति में या तो डॉक्टर चलाते हैं या नर्सिंग स्टाफ। विशेषज्ञ न होने की स्थिति में वेंटिलेटर किसी भी काम नहीं आ पा रहे हैं। कि चार दिन पहले ही पहुंची विधानसभा हरियाणा की विषय समिति ने इस समस्या पर भी कोई जानकारी नहीं ली थी।
इस समिति में शामिल पांच विधायकों की टीम ने अस्पताल में मरीजों को मिल रही सुविधाओं को लेकर जांच की थी। इस दौरान वे भी केवल स्टाफ की कमी का राग अलापते हुए दिखाई दिए थे। उनका कहना था कि सरकार तो डॉक्टर भर्ती करती है, लेकिन डॉक्टरों में ही नैतिकता न होने के चलते वे निजी अस्पतालों को अधिक तवज्जो देते हैं।
एक वेंटिलेटर की कीमत छह से आठ लाख रुपये की है। ऐसे में सात वेंटिलेटर की कीमत 42 लाख रुपये से अधिक बनती है। वेंटिलेटर के संचालित न होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है। इसके साथ ही अस्पताल में बनाए गए आईसीयू में भी मशीनों को चलाने के लिए डॉक्टरों की कमी है। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से यहां पर दो आईसीयू तो बना दिए गए, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण यह अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं।
अस्पताल में सात वेंटिलेटर हैं। चलाने के लिए ऑपरेटर नहीं हैं। आला अधिकारियों से ऑपरेटरों की मांग की गई है। इसको लेकर मुख्यालय में पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही ऑपरेटर अस्पताल में तैनात किए जाएंगे। - डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल।