संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। चैत्र नवरात्र के दौरान व्रत रखना जहां आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं के लिए यह समय और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है। महिलाओं डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों की सेवा करना भी एक तरह से पूजा है।
अस्पतालों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए और घर-परिवार की देखभाल के साथ व्रत रखना आसान नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद कई महिला डॉक्टर पूरी निष्ठा के साथ अपने धर्म और कर्तव्य का संतुलन बनाए रख रही हैं।
पूरे दिन व्रत रखने के बावजूद उनके चेहरे पर थकान या तनाव नजर नहीं आता, बल्कि वे पूरी ऊर्जा के साथ मरीजों की सेवा में जुटी रहती हैं।
व्रत से पहले कर्तव्यों का पालन करना जरूरी है। सुबह पूजा के साथ दिन की शुरुआत करें और दिनभर कार्यों को पूरा करें। शाम को माता के दरबार में जाकर आशीर्वाद लेना मानसिक शांति प्रदान करता है।
-डॉ. जया गोयल, आयुर्वेदिक चिकित्सक
व्रत के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। कामकाजी महिलाएं फल, दूध और सूखे मेवे जैसे संतुलित आहार का सेवन करें, ताकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहे। पर्याप्त मात्रा में पानी भी पिएं।
-डॉ. ममता कश्यप, आयुर्वेदिक चिकित्सक
मरीजों की सेवा करना भी एक प्रकार की पूजा है। डॉक्टर का सबसे बड़ा कर्तव्य मरीजों का स्वास्थ्य है, जिसे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाना चाहिए। सबसे पहले सेहत है।
-डॉ. प्रियंका, बाल रोग चिकित्सा अधिकारी
व्रत के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासकर गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
-डॉ. हमिता, गायनेकोलॉजिस्ट
व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि अनुशासन और संतुलन का प्रतीक भी है। व्रत रखने से पहले दिनभर के कार्यों की उचित योजना बनानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।
-डॉ. प्रवीन गिल, गायनेकोलॉजिस्ट
डॉ प्रवीन गिल
डॉ प्रवीन गिल
डॉ प्रवीन गिल
डॉ प्रवीन गिल