नई अनाज मंडी में किसानों का पीला सोना यानी धान की बिक्री न के बराबर हो रही है। अगर कहीं खरीद हो भी रही तो वह कौड़ियों के दाम।। जिस कारण किसान परेशान हैं। इतना ही नही सरकारी खरीद एजेंसियों के खरीद अधिकारी भी अपनी मनमानी कर रहे है। ये अपनी मर्जी से कभी भी छुट्टी कर जाते हैं और हर रोज देरी से आकर खरीद शुरू करतेे हैं। इस मामले में डीसी ने कहा कि अनियमितता के सुबूत मिले तो कार्रवाई होगी
आढ़ती रामकुमार, जसमेर, किसान सुभाष, महेंद्र, अमरीक ने बताया की मंडी के अंदर सरकारी एजेंसियों की बजाए इनके द्वारा अधिकृत मिल मालिकों के द्वारा ही किसानों की धान की खरीद की जाती है। नाम मात्र राइस मिल मालिक ही एजेंसियों के लिए धान की खरीद करने के लिये आते हैं। कुछ राइस मिल मालिक अपना कोटा पूरा होने की बात कहते हैं और तो कुछ बाद में लिखने की कहते है। जिस कारण से आढ़ती उनको धान बेचने से घबराते हैं कि कहीं खरीद के बाद लिखा न जाए तो वे उस धान की अदायगी कैसे लेंगे। जिस कारण से जिन मिलर्स के पास खरीद करने का कोटा बचा है, वे कम संख्या में होने के कारण मनमाने भाव से किसानों की धान की फसल की खरीद करते हैं और मजबूरी वंश किसान अपनी फसल औने पौने भाव पर बेचने को मजबूर हैं।
वहीं बताया यह भी जा रहा है कि कुछ राइस मिल भाव कम होने के कारण बिना कोटे के खरीद कर रहे है और वे आढ़तियों को बाद में लदान करने या सरकारी रजिस्टरों में इंद्राज करने की कहते हैं। अधिकारी समय पर भी नहीं आते। जिस कारण से आढ़ती सारा दिन अपने किसानों की फसल लिखवाने में परेशान रहते है। वहीं इस मामले में डीसी डा. प्रियंका सोनी का कहना है कि इसका सुबूत दो तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि मंडी में किसानों को कोई परेशानी ना हो।