संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गूगल ने जहां आम लोगों के लिए जानकारी आसान बना दी, वहीं अब लोग खुद डॉक्टर बनते जा रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर इलाज खोजने की प्रवृत्ति स्वास्थ्य के लिए नुकससानदायक साबित हो रही है। मरीज बिना चिकित्सकीय परामर्श के गलत उपचार अपना लेते हैं।
यह कहना है नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल का। उन्होंने बताया कि स्वयं दवा लेने को सेल्फ़-मेडिकेशन कहा जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। लोग इलाज तो ढूंढ लेते हैं, लेकिन गूगल पर एक बीमारी की कई दवाओं के विकल्प देखकर भ्रमित हो जाते हैं। बिना सलाह ली गई दवाइयां नुकसानदायक होती हैं तथा मरीज गंभीर हालत में पहुंच सकते हैं।
डॉ. अनिल ने बताया कि पहले लोग स्वास्थ्य समस्या पर सीधे चिकित्सक के पास जाते थे, लेकिन अब पहले इंटरनेट पर लक्षण सर्च कर इलाज निर्धारित कर लेते हैं। मरीज पहले से तय कर लेते हैं कि उन्हें कौन सी बीमारी है, फिर डॉक्टर के पास सिर्फ राय की पुष्टि करवाने जाते हैं। डॉक्टर सहमत न होने पर दूसरे-चौथे डॉक्टर बदलते हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में स्थिति बिगड़ जाती है, क्योंकि डॉक्टर की सलाह नजरअंदाज कर स्व-इलाज करना सही नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर स्वास्थ्य जानकारी के बढ़ते उपयोग से लोग बीमारी की गलत पहचान कर लेते हैं तथा बिना सही इलाज के गंभीर समस्याओं का सामना करते हैं। उन्होंेेने कहा कि सही इलाज के लिए चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है, न कि गूगल। गलतफहमियों व भ्रम दूर करने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा व जागरूकता फैलाना जरूरी है, ताकि लोग सही उपचार प्राप्त कर सकें। हर दवा के दुष्प्रभाव भी होते हैं। बिना चिकित्सकीय देखरेख के दवा लेना खतरनाक है।
ये ध्यान रखें
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इंटरनेट को सिर्फ सामान्य जानकारी तक सीमित रखें।
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लक्षण दिखने पर सीधे डॉक्टर से संपर्क करें।
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बिना सलाह जांच या दवा न लें।
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बार-बार बीमारी सर्च करने से बचें।
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मानसिक तनाव या डर महसूस हो तो मनोचिकित्सक से सलाह लें।