संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। संगीत, साहित्य, कला मंच कैथल एवं साहित्य सभा कैथल के संयुक्त तत्वावधान में सनातन धर्म मंदिर के सभागार में वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में पंचम वार्षिकी कवि-सम्मेलन एवं सम्मान-समारोह का आयोजन किया। इसमें अनिल गर्ग ने सुनाया- मोटे दूल्हे को देख घोड़ी भी ऐंठ गई। वो मुझ पर न बैठ जाये, पहले ही बैठ गई... पर जमकर तालियां बजीं।
एक किसान की दिनचर्या का आरंभ दिखाते हुए सतबीर जागलान ने सुनाया- गेहूं, चणा, जौ, बाजरा, देसी घी का खाणा रै। बांध कै रोटड़ी छालणे म्हं, फेर खेत म्हं जाणा रै। नीरु मेहता ने भगवान राम से प्रश्न पूछा : गर मैं मन का आंगन न सजा पाई तो, क्या तुम नहीं आओगे राम गुरु से पढ़ाने और ज्ञान देने की प्रार्थना करते हुए भोला राम ने कहा हाथ जोड़ कै अरज करूं, गुरुवर मन्नै पढ़ाइये। तीन लोक के ज्ञान तै ऊपर, सारा ज्ञान कराइये।
रवींद्र रवि अपनी गजल के एक शेर में कहा- तुम अकड़ते हो जिस अहम को लिये, उसका पट्टा उतार कर आना। रिसाल जांगड़ा ने कहा कि बिछुड़ गया है मुझसे हमसफर मेरा। सफर अभी तो बाकी है मगर मेरा। डॉ. तेजिंद्र ने कहा सर्दी का संग लेकर अंत। आया है ऋतुराज बसंत। डॉ. चतुर्भुज बंसल सौथा ने कहा बूढ़ा वृक्ष जो फल न दे फेर भी ठंडी रहे जा काया। इसे ढाल बूढ़े माणस की, टाब्बर पै रह सै छाया।
इस अवसर पर साहित्य सभा के प्रधान एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अमृत लाल मदान ने समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में शिक्षाविद एवं समाजसेवी रविभूषण गर्ग ने मुख्य अतिथि के रूप में तथा कविराज रामकुमार भारतीय और डॉ. शिव शंकर पाहवा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। मंच-संचालन डॉ. तेजिंद्र और श्याम सुंदर गौड़ ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत, साहित्य, कला मंच, कैथल के संस्थापक एवं समारोह-आयोजक श्याम सुंदर शर्मा गौड़ और रजनीश शर्मा ने सरस्वती वंदना के गायन से किया। इसके पश्चात मधु गोयल मधुल ने अभिनयात्मक मुद्रा में गाते हुए भजन- राम आएंगे, राम आएंगे से वातावरण को राममय बना दिया। पंकज खोसला ने एक अंधेरा-लाख सितारे- गीत की प्रस्तुति दी। गजल-गायक विश्वजीत ने राम का गुणगान करिये भजन गाकर तथा बिखरता हूं तो हवा से मुझको चोट लगती है गजल की प्रस्तुति देकर भावविभोर कर दिया।
गुरु-शिष्य की जोड़ी श्याम सुंदर शर्मा गौड़ और विश्वजीत ने राग बसंत-बहार में मधुर शास्त्रीय संगीत की तथा मीरा का पद मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरा न कोई की प्रस्तुति देकर सबको मंत्र-मुग्ध कर दिया। भजन-गायक कृष्ण भारती ने भी अपनी भक्ति-परक रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्ति के रंग में रंग दिया। कुलदीप शर्मा गौड़ ने इक प्यार का नगमा है- गीत प्रस्तुत करके श्रोताओं को झूमने पर बाध्य कर दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए रविभूषण गर्ग ने कहा कि उन्हें मानवता की सेवा करना बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने उपस्थित-जनों का आह्वान किया कि वे बच्चों को शिक्षा दें, संस्कार दें। बच्चों को बुजुर्गों का सम्मान करने की सीख दें। कवि-सम्मेलन में प्रो. अमृत लाल मदान, कमलेश शर्मा, राजकुमारी मदान, डॉ. शिवशंकर पाहवा, दिनेश बंसल, अनिल कौशिक, दिलबाग अकेला, राजेश भारती ने भी अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया।