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राष्ट्रीय समारोहों से हुआ स्कूलों का मोह भंग

Sat, 16 Jan 2016 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
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रशसान की अनदेखी के कारण स्कूल संचालकों ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से लगभग किनारा करने का मन बना लिया है। उत्सवों में बच्चों की सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद अनदेखी से व्यथित स्कूल संचालकों ने 26 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस समारोह के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई। शुक्रवार को इस समारोह के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चयन के लिए हिंदू स्कूल में प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे थे। जहां केवल 6 स्कूलों से ही विद्यार्थियों की टीमें पहुंची। जिस कारण अधिकारियों को कार्यक्रमों के चयन को स्थगित करना पड़ा।
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कार्यक्रमों में प्रस्तुति के बाद नहीं मिलती शाबासी तक
विद्यार्थियों एवं स्कूल संचालकों का कहना है कि एक बार सांस्कृतिक कार्यक्रम तक ही बच्चों की पूछ होती है। इसके बाद बच्चों को शाबासी तक नहीं दी जाती। गीता जयंती उत्सव में स्कूली विद्यार्थियों ने रात्रि करीब दस बजे तक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लेकिन वहां उन्हें पानी तक नहीं पूछा गया। पूरा दिन एवं देर रात्रि तक बच्चों को खाना घर से मंगवाना पड़ा।

सात कार्यक्रम, 6 स्कूलों की टीमें पहुंची
राष्ट्रीय पर्व पर मुख्यत: प्रशासन द्वारा  7 कार्यक्रमों का चयन किया जाता है। लेकिन शुक्रवार को जिले के 1500 से ज्यादा स्कूल कॉलेजों में से महज 6 स्कूलों की ही टीमें पहुंची। केवल समूह गान की तीन टीमों में स्पर्धा दिखाई दी। इसके अलावा पंजाबी गिद्दा, हरियाणवी डांस, कोरियोग्राफी में एक-एक टीम ने भाग लिया। कार्यक्रम में जाट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का समूह गान एवं कव्वाली, दर्शन अकादमी का समूह गान, एमडीएन पब्लिक स्कूल कलायत का समूह गान, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का हरियाणवी नृत्य, जाट स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा जुडो का प्रदर्शन, हिन्दू कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं का गिद्दा, आरकेएसडी पब्लिक स्कूल की नृत्यावली तथा जाखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की नृत्यावली शामिल थी।
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एडीसी जितेंद्र कुमार, उप-जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही सहित अन्य अधिकारियों ने इन टीमों की प्रस्तुति जरुरी देखी। लेकिन फाइनल चयन स्थगित करना पड़ा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अन्य स्कूलों की टीमों को बुलाया जाए। अब 19 जनवरी को फिर से कार्यक्रमों का चयन किया जाएगा।


ईनाम राशि में भी नहीं मिलता बच्चों को कुछ
विद्यार्थियों ने बताया कि हर बार समारोह में मुख्य अतिथि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के लिए लाखों रुपये की राशि घोषणा करके जाते हैं। लेकिन विद्यार्थियों को घोषित राशि से कुछ भी नहीं मिलता है। जिसके कारण समारोह में भाग लेने से विद्यार्थी किनारा कर रहे है।

मैं पांच साल पंजाबी गिद्दा व हरियाणवी डांस में भाग ले रही हूं। सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार करने के लिए 20 से 25 दिन लगते हैं। पढ़ाई खराब करने के बाद भी समारोह में बच्चों को शाबासी तक नहीं दी जाती। गीता जयंती उत्सव में रात को करीब सात बजे सांस्कृतिक प्रस्तुति थी। घर से खाना मंगवाकर कार्यक्रम में भाग लेना पड़ा था।
कक्षा बारहवीं की छात्रा कोमल वर्मा

एक महीने तक हमने लग्न से गीता जयंती समारोह में तैयारियां करके कार्यक्रम प्रस्तुत किया। लेकिन प्रशासन ने ईनाम देना तो दूर मुख्य अतिथि के साथ सामूहिक फोटो तक करवाना भी उचित नहीं समझा।
बारहवीं की छात्रा करिश्मा चावला

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर अच्छी से अच्छी प्रस्तुति देने के बाद भी हमें प्रशंसा पत्र तक नहीं दिया जाता। जिसके कारण सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का मन नहीं करता है।
छात्रा निशा

अधिकारियों के सामने रखी जाएगी विद्यार्थियों की समस्या
 उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि विद्यार्थियों को समारोह में सुविधाओं व ईनाम संबंधी आने वाली समस्याओं के बारे में प्रशासन को अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थी काफी मेहनत करते है। उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
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