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स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों की कमी के चलते 15 बसों के चालान

Wed, 08 Mar 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
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पूंडरी और आस-पास के गांवों में चला अभियान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशानुसार हरियाणा राज्य बाल संरक्षण आयोग द्वारा मंगलवार को पूंडरी व आस-पास के गांवों में स्थित प्राइवेट स्कूल की बसों की जांच की गई और खामियां मिलने पर 15 बसों के चालान किए गए। सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी के अन्तर्गत आयोग की सदस्य रमनदीप कौर के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में एसएचओ दीपक कुमार, ट्रैफिक से लेखराज, आरटीए कार्यालय से एमवीआई सुरेंद्र मोर व प्रोटेक्शन आफिसर विजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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टीम के सभी सदस्य सबसे पहले पूंडरी के आरएन स्कूल में पहुंचे और यहां उन्होंने 3 बसों के चालान किये। इसके अलावा 2 बसे बिल्कुल कंडम पाई गई। बसों की संख्या ज्यादा थी जबकि लेडी अटेंडेंट सिर्फ 3 ही थी, यहां किसी भी बस पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 डिस्पले नहीं मिला। इसके अलावा पुलिस वेरीफिकेशन भी नहीं करवाई गई थी। करनाल रोड स्थित श्वेता रायल पब्लिक स्कूल में भी 2 बसों के चालान स्पीड गवर्नर और डीएल पांच साल से पुराना न होने के चलते किये गए। इसके अलावा बसों पर स्कूल के विज्ञापन भी अधिकारियों ने हटा दिये और आग बुझाने वाले व अन्य उपकरणों की भी जांच की गई। बसों के आपातकालीन दरवाजे भी खुलवाकर देखे गए।

काफी मशक्कत के बाद बस का चालक बस का आपातकालीन दरवाजा खोल पाया। इस पर ट्रैफिक के अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को सब कुछ ठीक करवाने के निर्देश भी दिये। ध्रुव पब्लिक स्कूल फतेहपुर-पूंडरी में भी किसी ड्राइवर का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हुआ था, जिस पर उन्हें तुरंत वेरीफिकेशन करवाने के निर्देश दिये गए। इसके अलावा बसों में हाइड्रोलिक डोर भी नहीं थे। टीम ने हाबड़ी रेनबो स्कूल की एक बस का चालान, एवरेस्ट स्कूल बरसाना की एक बस, केवीएम स्कूल पाई की 4 बसों के एमटीएम हरसौला की 3 बसों के चालान किए। हरसौला स्कूल की बसों में ज्यादा बच्चे बिठाने को लेकर आयोग की सदस्या कौर ने स्कूल वालों को खरी-खरी सुनाई।
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इन नियमों पालन है, जरूरी-
1. बसों में स्पीड गवर्नर जरूर लगा हो।
2. निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे नहीं बिठा सकते।
3. चालक व परिचालक वर्दी में हो तथा महिला अटेंडेंट भी साथ हो इसके अलावा सभी की नेम प्लेट साथ लगी हो।
4.सुरक्षा उपकरण पूरे हो।
5. बस चालकों का लाइसेंस हैवी हो और उनका बस चलाने का तजुर्बा 5 साल से अधिक हो।
6. सीसीटीवी कैमरे लगे हो।
7. चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 डिस्पले होना चाहिए।
8. बसों के बाहर किसी भी तरह के विज्ञापन के फ्लैक्स न लगे हो।
9. सभी चालकों परिचालकों का पुलिस वेरीफिकेशन जरूर करवाया हो। इसके अलावा जो भी मापदंड है वो पूरे होने चाहिए। ऐसा न होने की सूरत में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
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