संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्रदेश के एकमात्र महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, मूंदड़ी में अब कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल का निर्माण किया जाएगा। इसमें देशभर से आने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत माध्यम में शिक्षा दी जाएगी, जबकि अंग्रेजी और हिंदी एक-एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल रहेंगे।
विश्वविद्यालय की सोच है कि विद्यार्थियों को गुरुकुल परंपरा की नैतिकता, अनुशासन व संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा का संतुलित स्वरूप प्रदान किया जाए। स्कूल निर्माण को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी है और विस्तृत रिपोर्ट के लिए एक कमेटी गठित की गई है। सरकार से स्वीकृति मिलते ही भवन निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा।
जनवरी से मूंदड़ी के स्थायी भवन में शुरू होंगी कक्षाएं ः विश्वविद्यालय का स्थायी भवन मूंदड़ी में तैयार हो रहा है। दिसंबर तक शुरुआती निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। प्रशासन के अनुसार 1 जनवरी से यहां कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी।
साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विश्वविद्यालय स्थापना की घोषणा की थी। 2018 में विश्वविद्यालय शुरू हुआ, लेकिन तब से अब तक यह अलग-अलग किराये के भवनों में संचालित होता आ रहा है। वर्तमान में वीसी कार्यालय, रजिस्ट्रार कार्यालय, परीक्षा शाखा आदि डॉ. बीआर आंबेडकर राजकीय कॉलेज, जगदीशपुरा में संचालित हो रहे हैं, जबकि कक्षाएं सरस्वती कॉलेज, टीक में लगती हैं। विद्यार्थियों को कॉलेज और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर से लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता है।
संस्कृत व्याकरण और साहित्य में स्नातक और स्नातकोत्तर के अतिरिक्त, विश्वविद्यालय ने वेद, ज्योतिष, व्याकरण, साहित्य, दर्शन, हिंदू अध्ययन, धर्मशास्त्र और योग में भी डिग्री पाठ्यक्रम शुरु किया हुआ है। योग, कर्मकांड, ज्योतिष एवं वास्तु में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी शुरु किए गए हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षार्थियों को आत्मनिर्भर नागरिक बनाना और भारत को वैदिक काल की तरह विश्वगुरु रूप में पुनः प्रतिष्ठा दिलाना है। इस समय 20 कोर्स चल हुए है। पीचएडी की भी पढाई यहां शुरु कर दी गई है। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय मंूदड़ी द्वारा वर्ष 2018 में स्थापित एक राज्य विश्वविद्यालय है। यह कैथल से 8 किमी पूर्व, राज्य की राजधानी चंडीगढ़ से 130 कि.मी., राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से 164 कि.मी., पेहोवा से 30 किमी और कुरुक्षेत्र से 45 कि.मी. दूर स्थित है। इस विश्वविद्यालय का नाम “महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।
विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कैंपस स्कूल आरंभ किया जाएगा। यह विद्यालय कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए होगा, जहां उन्हें गुरुकुल परंपरा की नैतिक शिक्षा दी जाएगी। नए भवन में 1 जनवरी से कक्षाएं शुरू कर दी जाएंगी। -प्रो. राजबीर सिंह, वीसी, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल
नए सत्र में विश्वविद्यालय के अधीन होंगे 18 कॉलेज
नए सत्र में अन्य जिलों के 18 कॉलेज भी विश्वविद्यालय से संबद्ध किए जाएंगे। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अधीन पंचकूला सहित केवल दो कॉलेज हैं, जो बढ़कर 20 हो जाएंगे। 22 एकड़ भूमि पर विश्वविद्यालय का भवन बन रहा है। पहले चरण में 64 करोड़ रुपये और कुल 180 करोड़ रुपये निर्माण पर खर्च किए जाएंगे। फिलहाल 20 कोर्स चल रहे हैं और लगभग 650 विद्यार्थी हरियाणा, हिमाचल, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, यूपी और पंजाब से यहां अध्ययन कर रहे हैं।