संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सत्संग का हमारे जीवन में गहरा प्रभाव पड़ता है। यह मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाता है। सत्संग का अर्थ है सत (सत्य) और संग (संगति), अर्थात् सत्य की संगति में समय बिताना। उपरोक्त विचार महंत विश्वनाथ गिरी ने सीवन में नवीन रहेजा के कार्यालय में आयोजित धार्मिक चर्चा के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जब हम संतों और ज्ञानी पुरुषों के साथ बैठते हैं और उनके विचारों को सुनते हैं, तो हमारी सोच और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में सुधार आता है। उन्होंने कहा कि सत्संग से हमारे भीतर के विकार धीरे-धीरे दूर होते हैं। मन की अशांति, तनाव, और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। जब हम ज्ञानवर्धक बातें सुनते हैं, तो यह हमारे मन में शांति और संतुलन लाती हैं। इसके साथ ही, सत्संग से हमें जीवन के असली उद्देश्य का बोध होता है, जिससे हम अपने कर्मों को सही दिशा में ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सत्संग से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमारे जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं है, बल्कि आत्मिक उन्नति में है। इससे हम मोह-माया से बाहर आकर अपनी आत्मा के प्रति जागरूक होते हैं।
सत्संग में भगवद गीता, रामायण, और अन्य धार्मिक ग्रंथों के उपदेशों को सुनकर हम धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना धैर्य और साहस के साथ करने की शक्ति प्रदान करता है। नियमित सत्संग में भाग लेने से हमारे अंदर अनुशासन, संयम, और त्याग की भावना प्रबल होती है।
इस अवसर पर महंत धीरज पूरी, भीषू चौधरी, सुभाष गर्ग, अशोक गोयल, मोहित बंसल, नीरज कंसल, मोहित गोयल व अन्य मौजूद रहे।