संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर में शुक्रवार को नगर पालिका कर्मचारी संघ से जुड़े सफाई कर्मचारियों ने ठेकेदार पर वेतन न देने और शोषण का आरोप लगाते हुए हड़ताल कर दी, जिससे पूरे दिन सफाई का काम पूरी तरह ठप रहा। इसके चलते शहर के प्रमुख कचरा प्वाइंटों से करीब 50 टन कचरा नहीं उठाया जा सका और जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए।
सभी सफाई कर्मचारी अपने वाहनों सहित नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और अध्यक्ष व ठेकेदार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए रोष प्रदर्शन किया। कार्यालय परिसर में काफी देर तक हंगामा और विरोध चलता रहा। कचरा उठाने वाले वाहनों के साथ रोष मार्च भी निकाला गया, जिससे नगर परिषद कार्यालय में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
शोषण, स्टाफ की कमी और गलत बिलिंग के गंभीर आरोप ः राज्य मुख्य संगठनकर्ता शिवचरण ने आरोप लगाया कि ठेकेदार न केवल आर्थिक शोषण करते हैं, बल्कि आवाज उठाने पर नौकरी से निकालने की धमकी भी देते हैं। उन्होंने कहा कि कैथल जैसे शहर में कम से कम 800 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा समय में 400 कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं हैं।
इनमें से भी 70 से अधिक कर्मचारी अधिकारियों, नेताओं और पूर्व मंत्रियों के आवासों पर ड्यूटी दे रहे हैं, जिससे शहर की सफाई का बोझ सीमित कर्मचारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक साल पहले ठेकेदार ने 150 सफाई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और बचे कर्मचारियों का डेढ़ महीने का वेतन लंबित है।
विक्की टांक ने आरोप लगाया कि ठेकेदार न तो मेहनताना देता है और न ही पारदर्शी बिलिंग करता है। उन्होंने कहा कि शहर में जहां 40 से 50 टन कचरा निकलता है, वहां 70 से 80 टन का बिल बनाया जाता है, जिससे घोटाले की आशंका भी उठती है।
इस मौके पर अमित क्योड़क, मुकेश कुमार, सुशील कुमार, महिला विंग प्रधान संतरो देवी, वर्षा, सुरेखा, विधा, सरोज, पूजा कल्याण, बीना, रामदेव, सन्नी कांडा, दर्शन कुमार, सुरेश कुमार, गौरव आदि उपस्थित रहे।
शाम को ईओ के आश्वासन के बाद काम पर लौटे कर्मचारी
अपराह्न करीब तीन बजे कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार, अध्यक्ष प्रतिनिधि सुमित गर्ग व ठेकेदार प्रदीप दहिया ने कर्मचारियों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें जल्द वेतन जारी करने और भविष्य में सम्मानजनक व्यवहार का आश्वासन दिया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल को अस्थायी रूप से स्थगित कर काम पर लौटने की घोषणा की।