कलायत। कलायत में डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों ने कचरा उठाने से साफ इंकार कर दिया है। स्थिति उस समय पेचीदा बन गई जब पुराने कर्मियों के काम पर न आने के कारण आनन-फानन में सफाई एजेंसी ने नए कर्मियों को फील्ड में उतार दिया। नए कर्मी कुछ समय में ही हाथ खड़े कर वापस लौट गए। इन परिस्थितियों में शहर में सफाई की बजाय गंदगी का आलम पैदा हो गया। जगह-जगह गंदगी के ढेर दिख रहे हैं।
इतना ही नहीं नगर पालिका अधिकारियों और सफाई एजेंसी पर शोषण का आरोप लगाते हुए डोर टू डोर सफाई कर्मियों ने नपा कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन पर लंबे समय से बगैर सुरक्षा उपकरणों के काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। बिना दस्ताने और जूतों के कई कर्मचारियों के हाथ-पांव कांच, लोहे, इस्तेमाल की गई मेडिकल सीरिंज और अन्य नुकीले ठोस कचरे के कारण बुरी तरह जख्मी हो चुके हैं। इतना ही नहीं कई कर्मचारियों को चर्म रोग जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। बार-बार शिकायत के बाद संबंधित समस्या का निवारण करने की बजाय एजेंसी ने सफाई कर्मियों की 17 दिन की पगार काट ली। जब उन्होंने पगार की मांग की तो काम से हटाने की धमकी दे डाली।
उनका कहना था कि ईपीएफ की राशि को भी खुर्दबुर्द किया जा रहा है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि शहर में प्रतिदिन मुश्किल से आठ टन कचरा एकत्रित हो पाता है। एजेंसी के लोग उन पर महज एक ट्रैक्टर व तीन टेपरों के जरिये 15 से 20 टन तक कचरे के आंकड़े जुटाने का दबाव बनाते हैं। इस प्रकार की ज्यादती से अब उनके सब्र का बांध टूट गया है। इसके चलते उन्होंने सफाई का कार्य करने से साफ इंकार कर दिया है। उनका संघर्ष जब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती।
डीएम देवेंद्र शर्मा ने बताया कि डोर-टू-डोर सफाई एजेंसी के खिलाफ जांच जारी है। इसके तहत शुक्रवार को एजेंसी और नपा अधिकारियों को सफाई कार्य के लिए निर्धारित नियमों के साथ-साथ
कार्ययोजना की रिपोर्ट लेकर उप मंडल सचिवालय कार्य हाजिरी होने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में यदि एजेंसी और नपा अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।