संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कानून में किए गए बदलावों को अधिवक्ताओं ने एकदम से समझना मुश्किल बताया है। कई अधिवक्ताओं ने कहा कि नए कानूनों को समझने के लिए हमें शून्य से शुरुआत करनी पड़ेगी। इसमें परेशानी आना स्वाभाविक है, लेकिन यही बदलाव है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि पहले से जो कानून व धाराएं बनीं हुई थी, उनके बारे में सभी अधिवक्ताओं को पता था। अब नए कानूनों को समझना दोबारा कानून की पढ़ाई करने के बराबर है। हालांकि जो बदलाव किया गया है वह सही है, लेकिन इसे समझने में अभी काफी समय लगेगा। अधिवक्ताओं के विचार इस प्रकार रहे।
आ सकती हैं थोड़ी दिक्कतें
नए कानून बनाए गए हैं, अभी इनको पढ़ा व समझा जा रहा है। इनकी धीरे-धीरे आदत पड़ेगी। नए कानूनों में कुछ सेक्शनों में भी बदलाव किया गया है। ये देखने में आ रहा है कि इसमें पुलिस भी अभी जो एफआईआर काट रही है, वह ज्यादातर पुराने तरीके से ओर पुरानी धाराएं लगा कर काट रही है। अब हमें नए कानूनों को समझने में समय लगेगा और थोड़ी दिक्कतें भी आ सकती हैं। - अधिवक्ता जितेंद्र कुमार।
नए कानूनों को समझना मुश्किल
नए कानून के संबंध में शुरुआत में तो सभी को समस्याएं आएंगी। दरअसल, पहले जो कानून थे वो सभी को याद थे। अब नए कानून आ गए हैं तो उनको समझने के लिए दोबारा हमें शून्य से शुरुआत करनी पड़ेगी। एक तरह से कानून की पढ़ाई दोबारा करनी पड़ रही है। जो अधिवक्ता 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं उनके लिए भी समझना मुश्किल हो सकता है। ये समय के अनुसार जरूरी भी है। - अधिवक्ता वंश मल्होत्रा, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय।