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ना शहीद का दर्जा मिला ना परिवार को सहायता

Sat, 22 Oct 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो कैथल
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जवान कपिल शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
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चंदाना गांव के भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के जवान कपिल शर्मा को शहीद हुए दो साल बीत गए लेकिन परिवार आज भी उम्मीद पाले हुए है कि सरकार उनकी सुनेगी। उनके बेटे को शहीद का दर्जा देगी। शहादत के समय पहले नक्सली हमले से मौत का कारण सामने आई और बाद में आला अधिकारियों के बीच हुआ विवाद भी सामने आया। मामला जो भी हो, परिवार को आज तक न्याय नहीं मिला।
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विदित रहे कि दो वर्ष पूर्व चंदाना गांव के कपिल की छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के समय 23 मई 2013 को शहादत हुई थी। गांव वासी सतपाल के पुत्र एवं दो बहनों के इकलौते भाई कपिल की शहादत के समय बताया गया था कि नक्सलियों के हमले के दौरान ग्रेनेड उठाते हुए ग्रेनेड फट जाने से उसकी मृत्यु हुई है। बाद में बताया गया कि कोई हमला नहीं हुआ था। संस्कार के समय इस वीर को न तो शहीद का दर्जा दिया गया और न ही भारतीय सीमा पुलिस का कोई जवान अंत्येष्टि में शामिल हुआ। ताबूत को लेकर आए सभी जवान श्मशान घाट से बाहर खड़े रहे। संस्कार के समय आए इन जवानों व पुलिस कर्मचारियों ने इस वीर को न तो सलामी दी और न ही राष्ट्रध्वज में शव को लाया गया। ऐसे में ग्रामीणों को संदेह हुआ कि कहीं उसके साथ दगा तो नहीं हुआ। बाद में पता चला कि उसके एक साथी ने रेल गाड़ी के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली है।

जवान के पिता मजदूर सतपाल ने बताया कि उसके इकलौते बेटे की मौत के बाद कोई भी नेता, अधिकारी, सामाजिक संस्था उनकी स्थिति जानने नहीं आया। अब बेटे की मौत के बाद उसमें मजदूरी करने की हिम्मत नहीं रही। उसकी दो जवान बेटियां है, जो विवाह के योग्य है। उनको चिंता सता रही है कि वे अपनी बेटियों का विवाह व परिवार का लालन पोषण कैसे करेंगे।
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वहीं विधायक जयप्रकाश उर्फ जेपी ने अफसोस जताते हुए कहा कि वे इस वीर को शहीद का दर्जा देने, जांच में क्या हुआ, सरकार की ओर से कोई क्यों नहीं आया इसकी जानकारी करेंगे। वे एक बार फिर सरकार से इस बारे में बात करेंगे।
गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र सिंह कालीरामण ने कहा कि इस वीर को कभी भुलाया नहीं जा सकता। जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी दी है। इसकी याद बनाए रखने के लिए उन्होंने उस समय गांव के चौक पर इसकी प्रतिमा लगाने, सड़क का नाम रखने की पूरी कोशिश की परंतु किसी कारण वे यह कार्य नहीं कर सके। उन्हें इस बात का मलाल रहेगा। वे बेशक अब सरपंच नहीं है, परंतु वे परिवार के साथ हैं। वे परिवार के साथ जांच करवाने में हर समय तैयार हैं।
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