कैथल। पिछले छह माह से 15 से ज्यादा बैठकों के बाद मिलर्स की 20 साल से भी लंबे समय से लंबित चली आ रही मांगें पूरी होने पर आज से मिलर्स ने हड़ताल खोलने का ऐलान किया है। हालांकि मिलर्स हड़ताल पर थे, लेकिन इस बार उन्होंने हड़ताल नाम देने की बजाए काम करने में ही असमर्थता जाहिर कर दी। यदि प्रशासनिक अमला मिलर्स की बात को पहले ही गंभीरता से ले लेता तो सात दिन तक हरियाणा की मंडियों में किसानों की दुर्गति ना होती। अब सीएम व डिप्टी सीएम के साथ हुई बैठकों में सहमति बनी और सहमति भी ऐसी बनीं कि मिलर्स की दशकों पुरानी मांगें पूरी हो गई हैं।
एक क्विंटल धान में 67 की बजाए 62 किलो चावल निकलने व मिलिंग चार्ज को लेकर लंबे समय से हरियाणा के मिलर्स संघर्ष कर रहे थे। कई तरह के भुगतान लंबित होने सहित लगभग 18 मांगों के मांग पत्र पर अधिकारियों द्वारा मिलर्स की जुलाई माह से शुरू हुई बैठकों के दौर के बावजूद अक्तूबर तक कोई ज्यादा गंभीरता से सुनवाई नहीं की। नई मिलिंग पॉलिसी में नए-नए नियमों, उठान के लिए ठेका देने जैसे नियमों ने आग में घी का काम किया और मिलर्स ने पूरी तरह से मिलें बंद रखने का मन बना लिया था। यही कारण था कि 26 सितंबर से सरकार के सरकारी खरीद शुरू करने के ऐलान के बावजूद दो अक्तूबर तक मिलर्स मंडियों में नहीं गए और धान का एक दाना नहीं खरीदा। जिस कारण मिलर्स को आखिरकार सरकारी अधिकारियों ने गंभीरता से लिया और बातचीत शुरू की। जिसमें एक अक्तूबर को करीब 15 से अधिक मांगें मान लीं। जिसमें एक क्विंटल धान में से 62 किलो चावल निकालने की मांग पर अध्ययन हेतु स्टडी ग्रुप गठित किया गया। जो केंद्र सरकार को सिफारिश भेजेगा। साथ ही सबसे बड़ी मांग मिलिंग चार्ज को 10 से बढ़ाकर 15 कर दिया गया। नए नियम ट्रंासपोर्टेशन के लिए भी मिलर्स को अपनी गाड़ियां लगाने की छूट तक देनी पड़ी।
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हंसराज सिंगला ने कहा कि वे सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के आभारी हैं। जिन्होंने 20 साल से भी लंबे समय से लंबित मिलिंग चार्ज को 25 रुपये किए जाने जैसी मांग मान ली और 62 किलो चावल के लिए स्टडी ग्रुप गठित किया है।