रोडवेज कर्मशाला के कर्मचारियों का अनुभव ऑक्सीजन संकट के बीच मरीजों के लिए जीवनदायक साबित हो रहा है। ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाने से लेकर उसे सांस लेने लायक बनाने तक की प्रक्रिया में आ रही छोटी मोटी तकनीकी दिक्कतों को रोडवेज कर्मचारी खुद ही दूर कर रहे हैं।
विदित रहे ऑक्सीजन सिंलिडर को गाड़ियों में लादकर अस्पताल में ले जाता जा रहा है। ऐसे में कई सिंलिडरों की वॉल इत्यादि टूट जाती है। ऐसी स्थित में ऑक्सीजन सिंलिडर उपयोग में नहीं लाया जा सकता। वहीं अगर सिंलिडर ऑक्सीजन से भरा है और उस दौरान नॉजल में लिकेज है तो इस दौरान स्थिति बिगडऩे का भी डर रहता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से रोडवेज के वर्कशॉप में ही सिलिंडरों की कमियों को दूर किया जा रहा है। इसके लिए रोडवेज आठ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जो शिफ्टों में दिन रात ड्यूटी कर रहे है। यहां तक की अस्पताल में भी कहीं पर सिलिंडर लगाने व उतारने में कोई दिक्कतें आती है तो कर्मचारी यहां भी सिलिंडरों से संबंधित समस्याओं को दूर करते है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ऑक्सीजन सिंलिडरों की देखरेख के लिए आठ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें महाबीर, गुजेंट, नरेश, अनिल, सुनील, रौनक,सुरेंद्र, सुनील, मनीष, नरेश, इंद्र शामिल है। इसके अलावा इन कर्मचारियों का रोडवेज बसों को एंबुलेंस बनाने में भी अहम योगदान रहा।
रोडवेज के वर्कशॉप मैनेजर सुरेंद्र मौर ने बताया कि जिलेभर में ऑक्सीजन सिंलिडर में कोई फाल्ट या कोई कमियां आती है तो कर्मचारी इसे ठीक कर देते हैं। अधिकतर सिलिंडरों में वॉल खराब होने की समस्याएं आ रही हैं। अगर ज्यादा ही समस्या आती है तो इसे बदला जाता है।