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कैथल डिपो में जरूरत 200 बसों की, रूटों पर दौड़ रहीं 120, लोग परेशान

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बसों की लगातार कम हो रही संख्या लोगों पर भारी पड़ रही है। कई शहरों के लिए शाम छह या सात बजे के बाद बस नहीं मिलती। जिस कारण लोग बस अड्डे से निराश होकर निजी वाहनों की ओर दौड़ते हैं। कई बार निजी वाहन भी नहीं मिल पाने के कारण लोगों को काफी परेशानियंा होती हैं। यही हालात लंबे रुटों पर है, जहां कई रुटों पर बसें बंद हो गई हैं, कई रुटों पर उनके फेरे कम हो गए हैं। जिस कारण डिपो में लगातार घट रही बसों की संख्या है। हालात ये हैं कि पांच साल में रोडवेज बेड़े से 40 बसें कंडम होकर बाहर हो चुकी हैं। इन सालों में नई बसें केवल 4 मिली हैं।
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कैथल बस स्टैंड से विभिन्न लंबे और लोकल रूटों के लिए रोजाना 18 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। ऐसे में यात्रियों की संख्या को देखते हुए यहां करीब 200 बसों की जरूरत है, लेकिन इस समय डिपो की मात्र 120 बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ रही हैं। शाम के समय ज्यादातर रूटों पर बसें जानी बंद हो जाती हैं, जिस कारण यात्रियों को अन्य वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। लंबे रूटों को जाने वाली कई बसें शाम छह बजे के बाद बंद हो जाती है।
कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने से भी बढ़ी दिक्कतें
रोडवेज में कर्मचारियों का ओवरटाइम बंद होने के कारण भी दिक्कतें बढ़ी हैं। शाम को पांच-छह बजे के बाद एकाध बस ही रूटों पर निकलती है। शाम को जैसी ही बस किसी रूट से आकर बस स्टैंड में प्रवेश करती है, उसी समय बस के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कई बार तो यात्रियों को बसों की खिड़कियों में लटक कर सफर करना पड़ता हैं। दूर-दराज जाने वाले यात्री ट्रेन को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं। शहर से गांवों को जोड़ने वाले कई ऐसे रूट हैं, जहां आज भी बस सेवा न के बराबर है। विद्यार्थी भी इस समस्या को लेकर कई बार रोडवेज प्रबंधन को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा।
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लोकल रूटों पर परेशानी ज्यादा
लंबे रूटों पर जाने के लिए तो बाहर के डिपो की एकाध बस छह बजे के बाद मिल भी जाती है, लेकिन लोकल रूटों पर दिक्कतें ज्यादा हैं। पाई की ओर गांव सेरधा तक जाने वाली अंतिम बस शाम को छह बजे तक है। उसके बाद पूंडरी तक पहुंचकर निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है। 6.20 बजे के बाद खनौरी की ओर जाने के लिए बसों की दिक्कत आती है। कैथल से खरकां वाया बाबा लदाना व कैथल से खरकां वाया पहाड़पुर की कोई बस 3.40 के बाद बस स्टेंड पर नहीं मिलती। छह बजे के बाद संगतपुरा की बस बंद हो जाती है, जो दिन में केवल एक या दो चक्क र ही लगाती है। टोहाना की तरफ अंतिम बस 5.40 पर जाती है, उसके बाद डिपो की कोई बस वहां नहीं जाती। वहीं कलायत की तरफ भी अंतिम बस 5.20 बजे जाती है। गुहणा कुराड़ की ओर जाने वाली बस की सेवा बंद हो चुकी है।
यात्रियों को करना पड़ा रहा घंटों इंतजार
गांव चक्कू लदाना जाने के लिए बस आने का इंतजार कर रही महिला संतोष देवी ने कहा कि वह करीब एक घंटे से बस स्टैंड पर बैठी है। अभी तक बस नहीं आई है। ये भी नहीं पता कि बस आएगी भी या नहीं। कुछ देर और बस नहीं आई तो उसे बाइपास पर जाना पड़ेगा।
गांव प्रभावत जाने के लिए बस आने की बाट जोह रहे यात्री हरी कृष्ण ने कहा कि 10 बजे से वह बस का इंतजार कर रहा है। करीब डेढ़ घंट से बस नहीं आई है। आसपास में पूछताछ भी की, लेकिन कोई पक्का जवाब नहीं मिल रहा। अब वह ऑटो के लिए बस स्टैंड से बाहर जा रहा है।
धर्मपुरा निवासी पप्पू ने बताया कि काफी देर से उसे बस नहीं मिली है। यात्रियायें से पूछा तो उन्होंने बताया कि बस आधा घंटा पहले यहां से चली गई है। अब ये भी नहीं पता कि दोबारा किस समय आएगी। वह चंदाना गेट जाएगा और वहां से किसी प्राइवेट साधन से घर जाएगा। सुबह भी वह ऑटो में ही आया था।
कुरुक्षेत्र जाने के लिए बस स्टेंड पर पहुंचे छात्र मनीष ने बताया कि वह काफी देर से कुरुक्षेत्र जाने वाली बस के इंतजार में खड़ा है। बस स्टैंड पर कुरुक्षेत्र की बस अभी तक नहीं आई है। अगर थोड़ी देर और बस नहीं आई तो वह नए रेलवे स्टेशन पर जाएगा और वहां से ट्रेन में सफर करेगा।
हर माह मुख्यालय को करवा रहे स्थिति से अवगत
रोडवेज महाप्रबंधक रामकुमार ने बताया कि डिपो में बसों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट हर माह विभाग मुख्यालय को भेजी जा रही है। डिपो की ओर से बसों की संख्या बढ़ाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। जैसे ही नई बसें आती हैं, उन्हें विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा।
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