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बिना टेंडर के छह से आठ गुना तक रिवाइज किया गलियों का एस्टिमेट

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क्या कोई गली जो 4.45 लाख रुपये में बनने वाली थी, उसके लिए बजट रिवाइज होकर 24.90 लाख रुपये हो सकता है। किसी तकनीकी जानकार से पूछा जाए तो उसका जवाब निश्चित तौर पर ना होगा। इसी तरह से अनेकों ऐसी गलियां हैं। जिसके लिए कैथल नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों ने एक तरह से बिल्कुल आंखें मूंद ली हैं। जैसे कि कोई पूछने वाला ही ना हो कि आपको कल जवाब भी देना पड़ सकता है? एस्टिमेट के माध्यम से खेले जाने वाले इस बड़े खेल का खुलासा पार्षद राकेश सरदाना ने नगर परिषद की हाउस की बैठक में किया। जिसमें अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए।
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क्या है मामला: कैथल में पिहोवा चौक के निकट नवीन बुक वाली एल के साइज की गली बनाने के लिए पहले 4.45 लाख रुपये का टेंडर लगाया गया। इस टेंडर को रद्द करके दोबारा से टेंडर लगाने की बजाए इसे रिवाइज करके इसके लिए 24.90 लाख रुपये की राशि की गई। इसी प्रकार के एक अन्य मामले में पंजाब होटल के निकट की गली में 2.50 लाख रुपये की गली व नाली के लिए एस्टिमेट को रिवाइज करके 19.63 लाख रुपये कर दिया गया। कुछ इसी प्रकार से अमरगढ़ गामड़ी वार्ड नंबर 24 में में 6 लाख रुपये के टेंडर वाली गली का रिवाइज एस्टिमेट 24.85 लाख रुपये कर दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता जगरुप ढुल ने कहा कि कोई भी टेंडर उसकी मूल राशि से पूरा नहीं होता है तो उसे केवल 5 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक रिवाइज किया जा सकता है। लेकिन नगर परिषद कैथल के अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत करके इन्हीं टेंडरों को 10 या 20 प्रतिशत नहीं 10 गुणा से अधिक तक रिवाइज कर रहे हैं। कोई अधिकारी देखने या जांचने वाला नहीं है। ऐसी जानकारी भी मिली है कि मिलीभगत का यह खेल यहीं नहीं रुकता। अधिकारी बाद में महज 2 लाख रुपये की गली का रिवाइज एस्टिमेट 20 लाख रुपये करते हैं। फिर गली के साइज को कम ज्यादा दिखाकर ज्यादा बिल भी पास करवाए जा रहे हैं।
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पार्षद राकेश सरदाना ने कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत ईओ को दी है। इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने नगर परिषद हाउस की बैठक में यह मामला उठाया है। जिसमें कोई भी अधिकारी इस बारे में जवाब नहीं दे पाया।
हर वार्ड में चल रहा है भ्रष्टाचार का यह खेल : परिषद सूत्रों ने बताया कि भ्रष्टाचार का यह खेल हर वार्ड में चल रहा है। जिसमें पहले टेंडर कुछ ओर राशि का होता है। इसके बाद टेंडर को रिवाइज एस्टिमेट बनाकर कई गुणा कर दिया जाता है। भ्रष्टाचार का यह खेल यहीं नहीं रुकता, बाद में गली को कम ज्यादा बताकर उसका बिल ओर भी ज्यादा बनाकर पास किया जाता है। पूरे मामले में विजिलेंस जांच हो तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
नगर परिषद के एमई राजकुमार ने यह कहकर बात टाल दी कि वे चंडीगढ़ गए हुए हैं। कागजात देखकर ही कुछ बता सकेंगे।
एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सामान्य तौर पर रिवाइज एस्टिमेट में 10 प्रतिशत तक राशि बढ़ा दी जाती है। इससे अधिक राशि यदि बढ़ाई जाए तो प्रशासनिक अप्रूवल लेनी पड़ती है। बैठक में रिवाइज एस्टिमेट के लिए अप्रूवल के लिए यह मामला रखा गया था। भविष्य में सभी जेई को निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि एस्टिमेट रिवाइज के मामले में ध्यान रखें।
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