संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में आए दिन फसल अवशेष जलाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआईझ में भी बढ़ोतरी होती जा रही है। रविवार को शाम पांच बजे एक्यूआई 380 दर्ज किया गया, जो बेहद ही खराब श्रेणी में आता है। इससे स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार होने को खतरा है। वहीं फसल अवशेष जलाने के मामले में अब तक जिले में 52 किसानों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
जिले में अब तक कुल 249 मामले फसल अवशेष जलाने के सामने आ चुके हैं। इनमें 136 मामले हर्षक एप से मिले हैं और 118 मामले नॉन हर्षक से मिले हैं। अब तक किसानों पर चार लाख 60 हजार रुपये कृषि विभाग ने फसल अवशेष जलाने पर वसूला है। कृषि विभाग के अधिकारी पहले किसानों को मौके पर जाकर समझाते हैं। नहीं मानने पर एफआईआर दर्ज की जाती है।
अब तक 52 किसानों पर मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीं एक्यूआई भी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कैथल की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार कर सकती है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के एसडीओ डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि जैसे ही कहीं पर आग लगने की सूचना मिलती है वह तुरंत मौके पर पहुंचते हैं। इसके अलावा भवन निर्माण सामग्री सहित अन्य धूल की वस्तुओं पर नियंत्रण का प्रयास है। पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
वहीं जिले में शनिवार को धान के अवशेषों को आग लगाने के 10 मामले सामने आए। इनमें गांव गगड़पर के किसान गुरध्यान सिंह, भूना गांव के प्रभु दयाल सिंह, गांव हरिगढ़ किंगन के टेकचंद, गांव क्योडक़ के सोहनलाल, ककराला अनायत के सुखविंदर सिंह, कस्बा सीवान के कुणाल सिंह, सुरेंद्र कुमार, सतीश व दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है।