कैथल। जिले में पशु आहार, भूसा और अन्य चारा सामग्री की बढ़ती कीमतों ने पशुपालकों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। पिछले चार महीने में पशु आहार के दामों में करीब 100 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है जिसका सीधा असर पशुपालकों की जेब पर पड़ा है। पशुपालकों ने बताया कि लागत के अनुसार दूध के दाम नहीं बढ़ रहे हैं जिससे उनका मुनाफा लगातार घट रहा है। बढ़ती लागत के कारण कई छोटे पशुपालक पशुओं की संख्या कम करने को मजबूर हो गए हैं। कई परिवार छह पशुओं से घटकर दो पशुओं तक पहुंच गए हैं। पशुपालकों का कहना है कि एक गाय या भैंस को प्रतिदिन चार से छह किलो तक पशु आहार की आवश्यकता होती है जबकि दूध की कीमतें उसी अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, जिस अनुपात में खर्च बढ़ा है।
- पशुपालक राम कुमार ने बताया कि शहरों में भी दूध के 80 रुपये प्रति लीटर तक मुश्किल से मिलते हैं जबकि गांवों में दूध 65 से 70 रुपये प्रति लीटर के भाव पर खरीदा जा रहा है। ऐसे में पशुओं के पालन-पोषण का खर्च निकालना भी कठिन होता जा रहा है। चारा, पशु आहार, भूसा और अन्य सामग्री के बढ़ते दामों ने पशुपालन को कम लाभकारी बना दिया है।
- पशु आहार विक्रेता राधे श्याम मलिकपुरिया ने बताया कि इस बार नरमा की उपलब्धता कम रहने से बिनौला, खल और अन्य पशु आहार सामग्री के दाम बढ़ गए हैं। सरसों की खल, जौ का चोकर और अन्य कच्चे माल की कीमतों में हुई वृद्धि का असर तैयार पशु आहार पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष बारिश के कारण कपास की फसल प्रभावित हुई थी जिसका असर अब बाजार में देखने को मिल रहा है।
भूसा और गुड़ ने भी बढ़ाया बोझ
पशु आहार के अलावा भूसा और गुड़ जैसी जरूरी सामग्री भी महंगी हो गई है। कुछ समय पहले 600 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा अब 900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसी तरह गुड़ के दाम 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 55 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के संतुलित आहार के लिए इन सामग्रियों का उपयोग जरूरी होता है, इसलिए बढ़ी कीमतों का सीधा असर उनकी लागत पर पड़ रहा है।
प्रमुख पशु आहार सामग्री के भाव
वस्तु
पहले का भाव
वर्तमान भाव
काला बिनौला (50 किग्रा)
2800 रुपये
3000 रुपये
नरमा बिनौला (50 किग्रा)
2700 रुपये
2800 रुपये
खल (50 किग्रा)
2100 रुपये
2420 रुपये
सोयाबीन
800 रुपये
900 रुपये
चने
60 रुपये/किग्रा 65 रुपये/किग्रा
गुड़ 45 रुपये/किग्रा 55 रुपये/किग्रा
भूसा (प्रति क्विंटल)
600 रुपये
900 रुपये
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राहत नहीं मिली तो बढ़ेंगी चुनौतियां
दुकानदारों ने बताया कि नरमा कपास की फसल पिछले वर्ष बारिश से खराब हो गई थी। इसके कारण कच्चे माल की उपलब्धता कम हुई और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पशुपालक रामकुमार का कहना है कि यदि पशु आहार और चारे की कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में पशुपालन करना और कठिन हो जाएगा। बढ़ती लागत के कारण कई छोटे पशुपालक पहले ही पशुओं की संख्या घटा चुके हैं और नए लोग इस व्यवसाय में आने से बच रहे हैं।
राम कुमार
राम कुमार
राम कुमार
राम कुमार
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