नई अनाज मंडी में धान की कम कीमत मिलने का असर दिखने लगा है। यहां पिछले साल 17 अक्तूबर तक 12 लाख 50 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी थी। जो इस बार महज 8 लाख 19 हजार क्विंटल हुई है। वहीं किसानों का कहना है कि उन्हें कागजों में एमएसपी 1888 रुपये दिखाया जा रहा है, लेकिन पूरा एमएसपी नहीं दिया जा रहा। जिस कारण कई किसान दूसरी मंडियों का रुख कर रहे हैं। इसके अलावा विधायक लीला राम और डीसी की बैठक के बाद जो बाहर के मिलर्स को खरीद की अनुमति देने की बात तय हुई थी, उसका भी सोमवार तक कोई हल नहीं निकल पाया। इस बारे में डीएफएससी का कहना है कि बाहर के किसी मिलर ने अभी तक उनके पास आवेदन नहीं किया है। जबकि कैथल के मिलर्स का कहना है कि पॉलिसी में यह लिखा गया है कि जब तक स्थानीय मिलर्स का कोटा पूरा नहीं हो जाता, तब तक बाहर का मिलर खरीद नहीं कर सकता।
किसान हिम्मतपुरा के इंद्र सिंह ने बताया कि उनकी धान एमएसपी पर नहीं बिक रही हैं। रसूलपुर के अमरीक सिंह ने कहा कि उनके गेटपास ही नहीं आ रहे। वहीं एक ने कहा कि पोर्टल पर उसके खाते में कम धान दर्ज है। इससे ज्यादा का गेट पास ही नहीं मिल पा रहा है। दयौरा निवासी संजीव ने कहा कि उसे गेटपास की समस्या बताई जा रही है। उसकी धान की नमी भी 17 प्रतिशत है। जिस कारण वे परेशान हैं। उनकी मांग है कि अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान दें।
आढ़ती अरुण कुमार ने कहा कि बाहर के मिलर्स इसी धान को एमएसपी पर खरीदने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी जा रही। जबकि हर रोज यही सुनने में आ रहा है कि बाहर के मिलर्स को अनुमति देने से मिलर्स में आपसी स्पर्धा होगी और कीमतें उठेंगी। लेकिन मंडी में इस बात का कोई असर नजर नहीं आ रहा है।
गेटपास वितरण में गड़बड़ी का आरोप- आढ़तियों ने आरोप लगाया कि गेटपास वितरण में भेदभाव किया जा रहा है। एक व्यक्ति को बैठाया गया है जो सुविधा विशेष मिलने पर गेटपास दे रहा है। जिस कारण आढ़ती परेशान हैं। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि जो भी दिक्कतें आ रही हैं, उसके बारे में अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है।
कमेटी सचिव दीपक बोले-अंडर ट्रांसफर हूं
वहीं स्थानांतरित होने के बाद कैथल मार्केट कमेटी कार्यालय में मौजूद मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने कहा कि वे अंडर ट्रांसफर हैं, पिछला कुछ काम लंबित है। उसे पूरा कर रहे हैं। पिछले साल 17 अक्तूबर तक 12 लाख 50 हजार क्विंटल धान की खरीद हुई थी। इस बार यह 8 लाख 19 हजार क्विंटल हुई है। गेटपास के लिए नई अनाज मंडी में दो, पुरानी अनाज मंडी व विस्तार अनाज मंडी में एक जगह गेट पास काटे जा रहे हैं। जो 25 प्रतिशत गेटपास सचिव के कोटे से हैं, उन्हें वे खुद बनाकर ऑपरेटर को दे रहे हैं। जो बाकायदा शेड्यूल में शामिल होकर आते हैं। बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके पास एक भी लिखित शिकायत नहीं है।
किसानों को पूरी कीमत दे रहे राइस मिलर
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान सचिन मित्तल ने कहा कि राइस मिलर्स व अधिकारियों को बेवजह बदनाम किया जा रहा है। राइस मिलर्स किसानों को पूरी कीमत दे रहे हैं। सरकार के नियमानुसार जिस धान में 17 से लेकर 19 प्रतिशत तक नमी है, उसमें 18 प्रतिशत नमी होने पर एक किलो व 19 प्रतिशत नमी होने पर दो किलो धान ज्यादा लेकर खरीद की जा रही है। गुहला व दूसरी मंडियों में भी एमएसपी से कीमत ज्यादा, वहां बड़े पंखे से सफाई करवाई जाती है। कैथल मंडी में बड़े पंखे से सफाई नहीं होती। यह बात समझ से परे है कि एमएसपी से ज्यादा कोई कैसे सरकारी धान खरीद सकता है।
किसी मिलर ने नहीं किया आवेदन
डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि एमएसपी से कम कीमत पर खरीद नहीं हो रही। किसानों के खाते में पूरा एमएसपी दिया जा रहा है। बाहर से किसी भी मिलर ने उनके पास आवेदन नहीं किया है, इसीलिए बाहर के किसी मिलर को अभी तक अनुमति नहीं दी गई है।