जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में चल रही स्कूलों की मान्यता संबंधित जांच के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। डीईओ कार्यालय में जिले में चल रहे 31 निजी स्कूलों का रिकॉर्ड ही नहीं है। वर्ष 22 सितंबर 2011 से पहले का पहली से आठवीं कक्षा का रिकॉर्ड भी लापता है। इतने वर्षों से विभाग लंबी चादर तानकर सोया हुआ था। नए जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले पर संज्ञान लिया और पुलिस को 31 स्कूलों की सूची भेजकर रिकॉर्ड गुम होने बारे शिकायत दी है।
ये है स्कूलों की सूची
1. आर्य गर्ल्स हाई स्कूल कैथल।
2. ब्रह्मपुत्र हाई स्कूल ढांड।
3. बीआरडीएम स्कूल कैथल।
4. एवरग्रे हाईस्कूल कैथल।
5. लक्ष्मी व्यापार कंपनी स्कूल कैथल।
6. पवनार हाई स्कूल कैथल।
7. प्रो. एसएस मेमोरियल हाई स्कूल कैथल।
8. सरस्वती बाल विहार अमरगढ़ गामड़ी कैथल।
9. आर्य पब्लिक सी.सै. स्कूल जडौला।
10. आदर्श निकेतन सी.सै. स्कूल चीका।
11. बाल विकास कलायत।
12. सेंट्रल सी. से. स्कूल कैथल।
13. गुरु ब्रह्मानंद सी. से. जडौला।
14. हिंदू गर्ल सी. से. स्कूल कैथल।
15. सरस्वती सी. से. स्कूल पाई।
16. विकास सी. से. ढांड।
17. शिव शंकर कसान।
18. आदर्श सी. से. स्कूल कौल।
19. हिंदू सी. से. स्कूल कैथल।
20. गुरु ब्रह्मानंद जडौला।
21. हिंदू गर्ल हाई स्कूल कैथल।
22. लवकुश सी. से. स्कूल मूंदड़ी।
23. शिव शंकर कसान।
24. आदर्श निकेतन सी. से. स्कूल कौल।
25. प्रभात सी. से. स्कूल पाई।
26. ज्ञानदीप शिक्षा निकेतन स्कूल फरल।
27. सरस्वती विद्या भारती स्कूल पबनावा।
28. गीता निकेतन सी.सै. स्कूल कौल।
29. मां सरस्वती शिक्षा निकेतन सी. से. स्कूल साकरा।
30. हरी बाल विद्या मंदिर कैथल।
31. ऐवरेस्ट सी. से. स्कूल बरसाना।
32. विद्या निकेतन सी. से. स्कूल कौल।
डायरी व डिस्पेच रजिस्टर भी लापता:
शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अंधेरगर्दी का आलम यहां तक है कि इस कार्यालय में 16 नवंबर 2016 से पहले का डिस्पेच रजिस्टर और सात सितंबर 2018 से पहले का डायरी रजिस्टर भी लापता है। जिसमें कार्यालय में आने जाने वाली डाक का विवरण दर्ज रहता है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों द्वारा इन रजिस्टरों के इर्द-गिर्द ही बड़ा खेल खेला गया है।
क्यों सोया था विभाग: विभाग के जिला कार्यालय से इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड यहां तक कि डायरी और डिस्पेच रजिस्टर भी 3-4 साल पहले के लापता हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले इसी कार्यालय द्वारा निजी स्कूलों के संबंध में जांच की गई थी। बड़ा सवाल ये है कि इतने महत्वपूर्ण कागजात व रजिस्टर लापता हैं तो अब तक विभाग क्यों सोया हुआ था? क्यों मामले में पहले पुलिस को सूचना नहीं दी गई? क्या संबंधित कर्मचारी, जिसके पास रिकॉर्ड के संबंध में जिम्मेवारी थी, उसकी कोई जवाबदेही नहीं है। यदि है तो विभाग द्वारा आज तक संबंधित कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। यदि नहीं की तो क्यों नहीं की गई?
रजिस्टर व कई नामी स्कूलों का रिकॉर्ड भी लापता होना बड़ी साजिश का हिस्सा- विभागीय सूत्रों ने बताया कि शिक्षा विभाग के डिस्पेच व डायरी रजिस्टर लापता होने के साथ-साथ कई नामी स्कूलों का रिकॉर्ड भी लापता है। जो एक बड़ी साजिश का हिस्सा है, ताकि उन स्कूलों का बचाव हो सके जो संदेह के दायरे में आते हैं।
नए डीईओ ने आते ही संभाला रिकॉर्ड
जिले में नव नियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने कार्यभार संभालते ही रिकॉर्ड संभाला और जिम्मवार कर्मचारियों की जानकारी ली। सिरोही ने बताया कि जिन स्कूलों का रिकॉर्ड व कार्यालय के दस्तावेज लापता हैं, उसके संबंध में कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखा गया है। पुलिस को जो भी जांच में कागजात व जानकारी चाहिए होगी, वह उपलब्ध करवा दी जाएगी। स्कूलों की मान्यता संबंधित शिकायत पर विभाग द्वारा अलग से भी जांच की जा रही है। अनाज मंडी चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर शमशेर सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग की एक शिकायत प्राप्त हुई है। इसमें रिकॉर्ड की गुमशुदगी बारे सूचना है। इस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।