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Kaithal News: गुरु पूर्णिमा को बन रहे दुर्लभ योग, करें साधना और ध्यान

Fri, 19 Jul 2024 05:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। गुरु पूर्णिमा को गुरु उपदेश को ग्रहण करने का महत्वपूर्ण समय होता है। इस बार गुरु पूर्णिमा तिथि पर लोगों में असमंजस है। इस बारे में पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि हर साल आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 21 को मनाया जाएगा। इस दिन कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। आत्म कल्याण के लिए साधना और ध्यान करने के साथ गुरु की पूजा करें।

शांडिल्य के अनुसार, धर्म पुराणों की मानें तो आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था और उनके जन्मोत्सव को गुरु पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है। महर्षि वेद व्यास न केवल महाभारत के बल्कि हिंदू धर्म के चारों वेदों के भी रचनाकार थे। इसलिए उन्हें दुनिया का पहला गुरु कहा गया है और गुरु पूर्णिमा के दिन उकना विधि-विधान से पूजन किया जाता है।
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शांडिल्य ने बताया की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 20 जुलाई शाम पांच बजकर 59 मिनट पर होगी। तिथि का समापन अगले दिन 21 जुलाई को शाम 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष में उदया तिथि का महत्व ज्यादा रहता है। इस तिथि के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा 21 जुलाई को है इसलिए गुरु पूर्णिमा 21 जुलाई को मनाया जाएगा। 21 जुलाई को सूर्योदय का समय सुबह 5 बजकर 37 मिनट रहेगा और सूर्यास्त का समय शाम सात बजकर 18 मिनट रहेगा। इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 7 बजकर 38 मिनट रहेगी। गुरु पूर्णिमा का व्रत तो 21 को रहेगा।
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शांडिल्य ने बताया कि इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, प्रीति योग, विषकुंभ योग का निर्माण होगा जो बेहद शुभ माने जाते हैं। इस साल इन शुभ योग के संयोग में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन स्नान दान बेहद खास माना जाता है।
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