रोडवेज कर्मचारियों ने निजी बस संचालकों के साथ हुए विवाद के बाद वीरवार सुबह चार से दस बजे तक हड़ताल की। जिस कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में एडीसी ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। करीब 10 बजे लोगों ने राहत की सांस ली।
बुधवार शाम निजी बस के चालक-परिचालक के साथ रोडवेज कर्मचारियों का बसों के समय को लेकर विवाद हो गया। विश्वकर्मा चौक पर दोनों बसों के चालकों के बीच विवाद हुआ। इसके बाद सीवन गेट चौक पर फिर दोनों पक्षों में बातचीत हुई। यहां मारपीट भी हुई। इसके बाद रोडवेज कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया। पीसीआर की गाड़ी गांव खानपुर तक बस को छोड़कर आई लेकिन सुबह तक इस मामले मेें निजी बस चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर कर्मचारी भड़क उठे।
कर्मचारियों ने सुबह चार से लेकर 11 बजे तक कोई बस नहीं चलने दी। हड़ताल की सूचना मिलने एडीसी जितेंद्र कुमार, थाना सिविल लाइन प्रभारी अशोक कुमार बस अड्डे पर पहुंचे। अधिकारियों ने कर्मचारी यूनियन से बातचीत की। कर्मचारियों ने रात की घटना के बाद कोई कार्रवाई न किए जाने पर रोष प्रकट किया।
अधिकारियों ने कर्मचारियों से लिखित शिकायत लेकर आरोपी निजी बस चालकों के खिलाफ केस दर्ज करने एवं बस को इंपाउंड करने का आश्वासन दिया। साथ ही डीसी ने भी कर्मचारियों को उनकी लंबित मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर कर्मचारियों ने हड़ताल खोली। लगभग 11 बजे ही बसों का संचालन शुरू हो पाया।
कर्मचारी नेता जसबीर सिंह ने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं के लिए अधिकारियों से बातचीत करने के लिए 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। जिसमें प्रधान लखपत राय, हाकम सिंह, मांगे राम शर्मा, रामफल शिमला, पहल सिंह तंवर, शमशेर सिंह सिसमौर, जसबीर शर्मा, राजबीर भाणा, आनंद शर्मा, ज्ञान सिंह, रामचरण शर्मा, बलराज, सतबीर भाणा, सुरेश कुमार बनवाला, सतीश शर्मा को शामिल किया गया। यदि 15 नवंबर तक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 16 को फिर से कर्मचारी चक्का जाम करेंगे।
बसों के समय को लेकर कहासुनी जरूर हुई थी लेकिन मारपीट का आरोप निराधार है।
दलबीर सिंह फौजी, निजी बस संचालक
पुलिस ने आरोपी निजी बस चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सुबह कर्मचारियों को कार्रवाई का आश्वासन देकर हड़ताल खुलवा दी थी।
अशोक कुमार, एसएचओ सिविल लाइन