संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय सेवा केंद्र पर रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर असंध सेवा केंद्र की प्रभारी राजयोगिनी उषा दीदी और ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी विशेष रूप से मौजूद रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘भाग्य विधाता’ फिल्म के प्रदर्शन से हुई। इसके पश्चात उषा दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल पारिवारिक बंधनों का नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और आत्म-संयम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र का अर्थ है — आत्मा के स्वरूप को समझते हुए काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे पांच विकारों से स्वयं की रक्षा करना और परमात्मा से सच्चा संबंध जोड़ना।
उषा दीदी ने कहा, कि आज जितनी सुरक्षा की व्यवस्थाएं बढ़ रही हैं, उतना ही व्यक्ति भीतर से असुरक्षित होता जा रहा है। ऐसे में आत्मिक स्मृति ही सच्चा रक्षण है। ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने कहा कि मनुष्य आज काम, क्रोध, ईर्ष्या जैसी अग्नियों में जल रहा है।
इन बुराइयों से मुक्त होकर ही हम एक स्वर्णिम समाज की स्थापना कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सभी ने रक्षासूत्र बंधवाया और नशा न करने तथा प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक पक्ष को सुंदरता से उजागर किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों को पौधे वितरित किए गए।