संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राजौंद के नाम से भी जिले में विधानसभा क्षेत्र था, लेकिन 2005 के क्षेत्र में नए परिसीमन के बाद इस हलके को तोड़कर कलायत व पूंडरी क्षेत्र का हिस्सा बना दिया गया। तब से यह क्षेत्र विकास के कार्यों में पिछड़ गया है।
इस विधानसभा सीट पर 1962 में पहला चुनाव लड़ा गया था। ज्यादातर चुनाव कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में रहे। कैथल एक नवंबर 1989 को जिला बना है, इससे पहले यह विधानसभा क्षेत्र लंबे समय तक जींद जिले का हिस्सा रहा है।
लोकसभा चुनाव में भी यह क्षेत्र सोनीपत सीट का हिस्सा रहा है। वर्ष 1977 के चुनाव में गुलजार मान यहां से जनता दल की टिकट पर विधायक रहे। 1982 में लोकदल की टिकट पर दुर्गादत्त अत्री यहां से विधायक रहे।
वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में रामकुमार कटवाल यहां से एमएलए बने। 1996 के विधानसभा चुनाव में तिवारी कांग्रेस की टिकट पर सतविंद्र सिंह राणा यहां से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। इस चुनाव में तिवारी कांग्रेस के तीन विधायक बने थे। बाद में इस पार्टी का वर्ष 1998 में कांग्रेस में विलय हो गया था।
2000 के विधानसभा चुनाव में इनेलो की टिकट पर रामकुमार कटवाल यहां से विधायक चुने गए और अंतिम चुनाव 2005 में इस हलके में हुआ और कांग्रेस के सतविंद्र राणा यहां से विधायक बने। इसके बाद यह हलका टूट गया। पहले दो चुनावों में यह हलका आरक्षित सीट भी रहा है।
लोगों का कहना, हलका टूटने के बाद पिछड़ा राजौंद
स्थानीय लोगों का कहना है कि 2005 में हलका टूटने के बाद यह विकास के क्षेत्र पिछड़ गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो खोला गया है, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी है। इसी तरह से रोडवेज बस सुविधा भी न के बराबर है। लोगों का कहना है कि जब इस क्षेत्र को हलका बनाया गया था, तब भी कभी मंत्रिमंडल में किसी ने स्थान नहीं दिया, अब हलका टूटने के बाद तो यह क्षेत्र वैसे ही पिछड़ा गया है। हलका टूटने से पहले राजौंद व पाई सहित जिले में छह विधानसभा क्षेत्र थे, लेकिन अब चार ही विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें कलायत हलका सबसे बड़ा हलका है।
कलायत, पूंडरी में यहां बनाए जाएंगे मतगणना केंद्र
कलायत विधानसभा क्षेत्र के लिए आरकेएसडी पब्लिक स्कूल के हॉल में मतगणना केंद्र बनाया जाएगा। पूंडरी विधानसभा क्षेत्र के लिए इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय के कॉमन रूम में मतगणना केंद्र स्थापित किया जाएगा।