फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बारिश, तेज हवाओं ने धान को पहुंचाया नुकसान

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। मौसम का कहर किसानों पर बरपा है। तेज हवाओं संग बारिश ने धान को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। करीब 10 हजार एकड़ रकबे की तैयार फसल खेतों में बिछ गई है। उधर, मंडियों में पड़ा धान भी भीग जाने से किसान परेशान हो रहा है। तिरपाल का सहारा लेने के बावजूद धान की ढेरियों में पानी घुस गया है। बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार शाम तक जिले में कुल 78 एमएम बरसात हुई है तो औसतन 12.33 दर्ज की गई है। दूसरी ओर मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक बारिश की चेतावनी देकर उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि खेतों में पककर तैयार धान की 1509 व पीआर (मोटी) किस्म बरसात के बाद जमीन पर बिछ चुकी है। उसका दाना काला पड़ने के साथ नुकसान की आशंका है। ऐसे में किसान को घाटे की चिंता सताने लगी है। दूसरी ओर बारिश से सब्जियों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। कृषि विज्ञानियों की सलाह है कि किसान निचले इलाके में निकासी की व्यवस्था कर पानी जमा न होने दे। ताकि नुकसान से बचा जा सके। अनाज मंडियों में आढ़तियों की हड़ताल के चलते बिक्री भी नहीं हो रही है। उठान का कार्य, भी बंद पड़ा है। किसानों ने बरसात से खराब हुई फसल को लेकर सरकार से मुआवजे की मांग की है। किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से धान की सरकारी खरीद का कार्य शुरू नहीं किया गया है। इस कारण पकी हुई फसल किसानों ने खेतों से नहीं कटवाई है। दूसरी ओर मंडियों में डाली गई धान की ढेरियों को नुकसान हो रहा है।
जिले मेें हुई बारिश
जगह बरसात
कैथल 11 एमएम
सीवन 29 एमएम
ढांड 04 एमएम
गुहला चीका 12 एमएम
पूंडरी 11 एमएम
राजौंद 11 एमएम
कुल 78 एमएम
निसरने वाली फसल में भी नुकसान की आशंका
धान की 1121, मुच्छल, 1718 सहित कई किस्म की फसल निसरने की प्रक्रिया में है, इन फसलों में भी नुकसान की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के कारण निसरने की प्रक्रिया में जो धान है, उसके दाने का रंग प्रभावित होगा। रंग यदि प्रभावित हुआ तो उसकी कीमतों पर असर निश्चित है। कैथल जिले में सर्वाधिक धान की फसल होती है। इस बार जिले में लगभग एक लाख 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई है। इसमें से बारीक किस्म की 1509 व पीआर ग्रुप की धान लगभग पक चुकी हैं और 1509 की इस समय आवक मंडियों में जोरों पर है और पीआर धान की आवक अभी शुरू हुई है। इसकी सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। करीब 60 प्रतिशत इलाके में पीआर ग्रुप की धान की रोपाई की गई है। शेष 40 प्रतिशत में बारीक धान है। 1121 व बासमती ग्रुप की दूसरी धान फसल अभी निसरने की प्रक्रिया में हैं।
विज्ञापन

किसान ईश्वर सिंह ने कहा कि दो दिन से मंडी में फसल पड़ी है। आढ़तियों ने हड़ताल की हुई है। बरसात में धान की फसल भिग गई है। किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसान सुभाष खुराना का कहना है चार दिन से मंडी बैठा हुआ है। कोई खरीद नहीं हुई है। खेतों में फसल पककर तैयार हो गई थी। वह कुछ बरसात के कारण खेतों में बिछ गई है। किसान को भारी नुकसान है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि इस समय हुई बरसात धान की फसल के लिए नुकसानदायक है। मंडी में जो फसल पहुंची है, वह भीग गई है। वहीं खेतों में जो धान पक चुकी है, यदि वहां ओर तेज हवा चल गई तो यह जमीन पर बिछ जाएगी। दूसरी ओर जहां फसल निसरने की प्रक्रिया में हैं, वहां दाने के रंग पर असर होगा। जो बिकने के समय कीमतों पर असर डालता है। इसके अलावा कटाई प्रभावित होगी, जो फसल पूरी तरह से पक चुकी है, उसमें कंबाइन चलाने में अभी समय लगेगा। इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा दिन तक मौसम इसी प्रकार रहा तो धान की फसल में भारी नुकसान होगा।
शहर की निचली कॉलोनियों में हुआ जलभराव
शहर के रेलवे गेट, करनाल रोड पर लघु सचिवालय, कबूतर चौक, भगत सिंह चौक, अमरगढ़ गामड़ी, न्यू करनाल रोड,न्यायालय परिसर, माता गेट, डोगरा गेट, चंदाना गेट पर जलभराव होने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। शहर की निचली बस्तियों में कॉलोनी वासियों को अधिक दिक्कतें आईं। यहां पर पानी का जलभराव हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें