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Kaithal News: बारिश और तेज हवाओं से गिरी धान की फसल, किसान परेशान

Tue, 07 Oct 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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जमीन पर बिछी धान की फसल।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल/कलायत/पाई। सोमवार सुबह से मौसम में बदलाव के बाद प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। कैथल में सुबह 8 बजे से लगातार बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। जिले में रविवार देर रात शुरू हुई बारिश ने किसानों की धान की फसल मंडी में भीगने और खेतों में बिछने का कारण बनी। बर्बाद होती फसल देखकर किसानों के चेहरों पर परेशानी साफ नजर आ रही है।

रुक-रुक कर हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहले से ही नमी प्रभावित फसल पर बूंदाबांदी का असर पड़ा, जिससे किसानों को धान को दोबारा सुखाकर मंडी में लाना पड़ेगा।
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किसानों ने अनुमान लगाया कि प्रति एकड़ करीब 60-70 मन की कमी, यानी लगभग 60 हज़ार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हुआ है। अब बारिश और तूफ़ान से 1718 और 1121 किस्म की धान भी गिरकर खराब हो रही है। मोटी धान की फसल रखने वाले किसानों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, लगातार बारिश और तेज हवाओं ने तैयार धान की फसल को प्रभावित किया है, किसानों के लिए यह समय चिंता और आर्थिक नुकसान लेकर आया है। पहले से ही कर्ज में डूबे किसान अब और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
कलायत में बिछ गया धान

कलायत के सजूमा रोड के आसपास कई खेतों में खड़ी बारीक धान की किस्में तेज हवाओं और बारिश की वजह से बिछ गई हैं। किसानों राजबीर, लाभ सिंह, पवन कुमार, महाबीर, सतपाल और राममेहर ने

बताया कि इस समय धान पक चुकी थी और विभाग की एडवाइजरी के अनुसार पानी लगाया गया था, लेकिन तेज हवाओं ने फसल को गिरा दिया। किसानों ने सरकार से स्पेशल गिरदावरी कर नुकसान का आकलन और मुआवजा देने की मांग की।
खराब मौसम में पानी लगाने से बचें। जिन खेतों में पानी लगा हुआ है और फसल गिर गई है, उनका पानी तुरंत निकालें। पीआर धान कट चुका है, उसे अगले दो दिनों तक मंडी में न ले जाएं। -डॉ. सतीश नारा, उपमंडल अधिकारी, कृषि विभाग, कलायत
चिंता बढ़ी, दोबारा बारिश हुई तो और होगा नुकसान

राजौंद। मंडियों में धान की नमी अधिक होने की वजह से खरीद में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर बारिश से किसानों का नुकसान हो गया। उनका कहना है कि यदि और बारिश हुई तो नुकसान ज्यादा बढ़ेगा।

सोमवार सुबह मौसम में बदलाव ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी। किसान कुलदीप और रामफल ने बताया कि बारिश से धान की फसल में नुकसान होगा, क्योंकि फसल पककर तैयार हो चुकी है, जिससे कटाई में और अधिक समय लगेगा। किसानों का आरोप है कि मंडियों में नमी को बहाना बनाकर फसल का रेट कम किया जा रहा है। वर्तमान में धान का रेट 2,378 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद कई जगह इसे 2,000 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संवाद

पाई में भारी नुकसान

पाई में भी हवाओं और बारिश ने किसानों की तैयार फसल को जमीन पर बिछा दिया। किसानों महेंद्र, सुभाष, महावीर, दिलबाग और बलवान के अनुसार अबकी

सामान्यतः एक एकड़ से 90 मन उत्पादन होता, अब मुश्किल से 20-30 मन ही निकल पा रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से आज और कल प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को सिर्फ उत्तरी और पूर्वी जिलों में इसका असर दिखेगा। 9 अक्टूबर के बाद यह विक्षोभ आगे बढ़ जाएगा और उत्तरी हवाओं के साथ हल्की ठंड का आगमन होगा। -डॉ. रमेश चंद्र वर्मा, मौसम विशेषज्ञ
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सुबह से बारिश, अनाजमंडी में भीगा धान

रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण नई अनाजमंडी में रखी धान की ढेरियां भीग गई हैं। किसान पहले से ही नमी को ध्यान में रखते हुए धान को सुखाने के लिए रखे थे, लेकिन अब उन्हें और इंतजार करना पड़ेगा। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल भी बारिश और हवाओं के कारण बिछ गई है। किसान कहते हैं कि बारिश ने कटाई में बाधा डाल दी है।

जमीन पर बिछी धान की फसल।

जमीन पर बिछी धान की फसल।

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