कलायत। कड़ाके की ठंड में जब लोग सुबह रजाई छोड़ने से कतराते हैं, उसी समय गांव कैलरम की गलियों और नालियों में एक युवा पूरे जोश के साथ सफाई करता नजर आता है। यह कहानी है गांव कैलरम के युवा राहुल कुंडू की, जो न तो सफाई कर्मचारी है और न ही इस कार्य के बदले कोई वेतन लेता है। न कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा और न ही किसी पद की चाह—बस एक ही जुनून है, अपने गांव को पूरी तरह स्वच्छ बनाना।
राहुल ने बताया कि वह हर दिन एक लक्ष्य तय करता है और एक गली की पूरी तरह सफाई किए बिना रुकता नहीं। यह दिनचर्या वह वर्ष 2024 से लगातार निभा रहा है। शुरुआत में गांव के लोग उसे सनकी समझते थे, लेकिन उसकी लगन और निरंतर प्रयासों ने अब लोगों की सोच बदल दी है और कई ग्रामीण उसके साथ कदम से कदम मिलाने लगे हैं।
राहुल कुंडू ने बताया कि वर्ष 2016 में वह ड्राइवर की नौकरी के लिए चंडीगढ़ गया था। करीब आठ वर्षों तक कैब चलाने के दौरान उसने भले ही अधिक कमाई न की हो, लेकिन स्वच्छता का महत्व जरूर सीखा। चंडीगढ़ की साफ-सफाई से प्रभावित होकर उसने अपने गांव को भी उसी तरह स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। वर्ष 2024 में वह चंडीगढ़ छोड़कर गांव कैलरम लौट आया।
गांव में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अधिकांश गलियां और नालियां गंदगी से भरी हुई थीं। सफाई कर्मचारियों की भी भारी कमी थी। ऐसे में राहुल ने अकेले ही एक गली की सफाई से अपने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में लोग उसका मजाक उड़ाते रहे, लेकिन वह अपने लक्ष्य पर अडिग रहा। संवाद
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अब तक वह गांव की करीब 20 गलियों की पूरी तरह सफाई कर चुका है और बंद पड़ी नालियों को साफ कर गलियों को गंदे पानी से मुक्त कर चुका है।
राहुल ने बताया कि जो लोग पहले उसका उपहास उड़ाते थे, वही आज उसके अभियान में सहयोग कर रहे हैं। जिस गली में वह सफाई शुरू करता है, वहां के युवा और महिलाएं स्वतः मदद के लिए आगे आ जाते हैं। उसके पास एक मोटरसाइकिल रिक्शा है, जिसमें वह गलियों और नालियों से निकला कचरा एकत्र कर गांव से बाहर फेंकने जाता है।
राहुल ने स्पष्ट किया कि उसकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। उसका एकमात्र सपना है कि गांव कैलरम सफाई के मामले में एक आदर्श गांव बने। परिवार का पालन-पोषण वह कुछ भैंस पालकर दूध बेचने और एक कैब से मिलने वाली बुकिंग के जरिए करता है।
राहुल ने बताया कि उसकी सोशल मीडिया पर डाली गई सफाई से जुड़ी वीडियो देखकर विदेशों में कार्यरत कई युवाओं ने आर्थिक सहयोग की पेशकश की है, लेकिन उसका कहना है कि इस कार्य के लिए पैसे की जरूरत नहीं है। जब गांव में गंदे पानी की निकासी के लिए स्थायी समाधान करना होगा, तब गांव पंचायत के माध्यम से सहयोग लिया जा सकता है।
13केएलटी5: भारी ठंड में गांव कैलरम की नालियों की सफाई करता राहुल कुंडू
13केएलटी6: जानकारी देते राहुल कुंडू
13केएलटी5: भारी ठंड के मौसम में गांव कैलरम की नालियों को साफ करने में लगा राहुल कुंंडू