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अनाज मंडी में हड़ताल के कारण किसान परेशान

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कृषि अध्यादेशों को लेकर तीन दिनों से आढ़तियों की हड़ताल से न तो मंडी में किसानों की धान को खरीदा जा रहा और न ही धान की जिम्मेवारी आढ़ती ले रहे है। कई किसानों ने बताया कि वह हड़ताल के पहले दिन ही मंडी में पहुंचे थे, रविवार तक भी उनकी फसल नहीं बिकी है, जिस कारण से कई किसान धान की फसल को वापस ले जाने पर मजबूर है। आढ़तियों की हड़ताल होने की वजह से जिन किसानों की फसल मंडी में पड़ी है, उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान प्रदीप चहल, रामस्वरूप, नन्हा व जगदीप ने बताया कि इस बार तो सरकार ने किसानों को आर्थिक बोझ तले दबा दिया है। मंडी में किराए पर साधन करके धान लेकर आए हैं, लेकिन अब बिक नहीं रहा। साधन का किराया भी देना पड़ रहा है और समय भी खराब हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मंडी हड़ताल खत्म करके किसानों की फसल को उचित रेट पर खरीदा जाए।
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किसानों को हो रहा आर्थिक नुकसान- खनौरी के किसान जसवंत सिंह ने बताया कि वह दो ट्राली धान की लेकर मंडी में आए है। लेकिन आढ़तियों ने हड़ताल कर रखी है, वह तीन हजार रुपए में किराए पर लेकर आया है। इसके साथ ही एक मजदूर को 500 रुपये की दिहाड़ी पर देकर रात को धान के पहरे पर बैठाया जाता है। इसके साथ ही इस बार धान के भाव भी अच्छे नहीं मिल रहे, जिससे उनको आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार से उनकी मांग है किसान व आढ़ती की मांगे मानकर किसानों की फसल उचित रेट पर खरीदे।
1500 रुपये तक सस्ती बिक रही धान की फसल- सरदार अमरजीत जगदीशपुरा ने बताया कि वह मंडी में धान लेकर आया है। लेकिन आढ़तियों की हड़ताल के चलते बोली ही नहीं आ रही। बीते वर्ष धान की फसल का रेट अच्छा मिल रहा था, लेकिन इस बार एक हजार से 1500 रुपये तक सस्ती बिक रही है। इसका सीधा असर किसानों पर है। हर रोज मंडी में धान की आवक बढ़ती ही जा रही है। यदि हड़ताल ऐसे ही जारी रही और फसलों की बिक्री नहीं हुई तो देश में आर्थिक मंदी आ सकती है।
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