राजौंद के वार्ड नंबर पांच गांव खुरड़ा में कोरोना संक्रमित 32 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत के बाद लोगों ने राजौंद में निर्धारित श्मशान घाट में मृतक महिला का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। इसके बाद सूचना पर पहुंची प्रशासन की टीम ने कैथल लाकर मृतक महिला का अंतिम संस्कार किया।
प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक 8 माह की गर्भवती महिला का इलाज खानपुर में चल रहा था। रविवार को दोपहर बाद महिला की मौत हो गई। अंतिम संस्कार के लिए उसके शव को पहले राजौंद लाया गया पर यहां एकत्रित हुए लोगों ने श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने का विरोध किया। लोगों ने महिला के परिजनों से कहा कि वे यहां कोरोना पीड़िता का अंतिम संस्कार नहीं करने देंगे। कहीं ओर ले जाकर अंतिम संस्कार किया जाए। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी रणबीर सिंह भी पहुंचे और उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया। जब लोग नहीं मानें तो प्रशासन की टीम ने कैथल में लाकर मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया।
एसएमओ डॉ. संदीप सिंह ने बताया कि 32 वर्षीय गर्भवती महिला की रविवार को कोरोना से मौत हो गई। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार कोविड मृतकों का दाह संस्कार करने के लिए पूरे ब्लॉक का राजौंद के पूंडरी मार्ग के साथ लगते श्मशान घाट को चयनित किया गया है। यहां पर लोगों ने दाह संस्कार करने का विरोध किया। इसके बाद कोरोना मृत महिला का दाह संस्कार कैथल में करवाया गया।
वहीं राजौंद थाना प्रभारी रणबीर सिंह ने कहा कि सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। ग्रामीणों के विरोध के चलते गर्भवती महिला को कैथल लाया गया और पुराने अस्पताल के पास बने श्मशान घाट में उसका दाह संस्कार किया गया।
पहले भी हुए हैं संस्कार
एसएमओ डॉ. संदीप सिंह ने कहा कि पहले भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत होने के बाद राजौंद के इसी श्मशान घाट में मृतकों का संस्कार किया गया है। इस बार ही लोगों ने विरोध किया है। महामारी को देखते हुए किसी व्यक्ति की मौत कब हो जाए, पता नहीं। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मी भी कब तक संस्कार बाहर करते रहेंगे। लोगों को कम से कम इस बारे में तो सोचना चाहिए।