गुहला चीका। पंजाब सरकार में सीपीएस व वरिष्ठ अकाली नेता संत बलबीर सिंह घुन्नस ने कहा कि जिसने भी खालसा पंथ से टकराने की कोशिश की है, उसे हार का सामना करना पड़ा है। गुहला-चीका के एतिहासिक छटी एवं नौवीं पातशाही गुरुद्वारा साहिब चीका में पत्रकारों से बातचीत में बलबीर सिंह ने कहा कि खालसा पंथ का तो अंग्रेज भी मुकाबला नहीं कर पाए थे, तो उसके आगे हरियाणा के सीएम की तो बिसात ही क्या है।
उन्होंने कहा कि हुड्डा सरकार ने सिखों को दोफाड़ करके प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास किया है, नतीजतन प्रदेश के सिखों को सरकार की इस चाल को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकाली अलग कमेटी की बात करने वालों को अभी भी अपना छोटा भाई मानते हैं और उनसे इस मुद्दे पर हर प्रकार की बात करने को तैयार हैं। परंतु पहले उन्हें अकाल तख्त पर जाकर अपने गुनाहों की माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा कि अलग कमेटी वालों को सरकार की यह चाल समझ लेनी चाहिए कि हुड्डा सरकार को सिखों से किसी भी प्रकार की हमदर्दी नहीं है, नतीजतन उन्होंने अलग कमेटी केवल वोट लेने के लिए ही बनाई है।
अलग कमेटी के नेता सरकारी की कठपुतली
घुन्नस ने अलग कमेटी के अग्रणी नेताओं को सरकार की कठपुतली बताया और कहा कि वे कांग्रेस सरकार के हाथों में खेल रहे हैं और हुड्डा जैसा उन्हें करने को कह रहे हैं, वे मजबूरन वैसा ही कर रहे हैं। उन्होंने गुरुद्वारों में दबंग किस्म के लोगों को बिठा देने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया और कहा कि गुुरुद्वारों में किसी प्रकार का भी कोई दबंग अथवा शरारती तत्व नहीं हैं, सभी सेवादार आ और जा रहे हैं। जिनका मकसद संगत की सेवा करना व सरकार द्वारा गुरुद्वारों पर संभावित कब्जों को रोकना है।
उन्होंने सरकार को सलाह दी कि अभी भी समय है कि वह सिखों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी न करे और पंजाब व हरियाणा दोनों भाइयों को लड़वाने की अपेक्षा इन्हें स्वयं ही अपने फैसले करने दे। उन्होंने चेताया कि यदि सरकार ने दखलंदाजी बंद न की तो फिर इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहे। इस अवसर पर सुखवंत सिंह सरोह, बलदेव सिंह, जयपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, गुरलाल सिंह, सतबीर सिंह, मलकीत सिंह चंगाल, कश्मीर सिंह बीकर, रणदीप सिंह ढिलवां, नराता राम, डोगर सिंह, दलबीर सिंह व राकेश गिल भी मौजूद थे।