कैथल। नियम 134 ए खत्म होने के बाद अब आगामी शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों में इस नियम के तहत विद्यार्थियों के दाखिले नहीं होंगे। बीते सत्र में जिन विद्यार्थियों ने 134 ए के तहत निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण की, स्कूल केवल उन्हीं विद्यार्थियों की परीक्षाएं करवाने तक जिम्मेवार रहेंगे। आगामी सत्र से करीब आठ हजार विद्यार्थियों को नियम 134-ए के तहत दाखिला नहीं मिल पाएगा। उन्हें या तो सरकारी या फिर निजी स्कूलों में निर्धारित फीस जमा करवानी होगी। अब ऐसे बच्चों के लिए आरटीई विकल्प के रूप में बचा है, जो निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। गौरतलब है कि आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की 65 प्रतिशत फीस केंद्र सरकार और 35 प्रतिशत फीस राज्य सरकार देती है। इसके तहत अगर किसी निर्धारित क्षेत्र में कोई सरकारी स्कूल नहीं है तो बच्चे क्षेत्र के किसी निजी स्कूल में आरटीई के तहत निर्धारित सीटों पर दाखिला ले सकते हैं। इस संबंध में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव वरुण जैन ने कहा कि एसोसिएशन ने न तो कभी 134 ए का विरोध किया और न ही आरटीई के खिलाफ हैं। इस समय आरटीई के तहत जिले में कोई भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण नहीं कर रहा है। उन्हें नियमों के तहत बच्चों को पढ़ाने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन सरकार स्कूलों को दी जाने वाली विद्यार्थियों की फीस के नियमों को सरल करे। विद्यार्थियों का चयन करवाने की प्रक्रिया भी सही नहीं है। सरकार बच्चों के खाते में फीस के पैसे जारी करे और समय पर फीस दे ताकि बच्चे खुद राशि निकालकर किसी मनचाहे स्कूल में दाखिला ले सकें और समय पर फीस दे सकें।