कैथल। जिले में निजी बस संचालक बुजुर्ग यात्रियों को सरकार की आधा किराया छूट योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। परमिट के शर्तों के बावजूद स्टेज कैरिज स्कीम-2016 के नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे हजारों बुजुर्गों को रोजाना आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। स्टेज कैरिज परमिट स्कीम के अनुसार सरकारी बस की तरह निजी बसों में योजना लागू करनी अनिवार्य है। यह मामला पहले भी कष्ट निवारण समिति की बैठक में हरियाणा के ऊर्जा एवं परिवहन मंत्री अनिल विज के समक्ष उठ चुका है। इसके बाद आरटीए विभाग की ओर से अब तक केवल सात से आठ चालान ही किए गए हैं। इसके अलावा कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से निजी बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
जिले में आरटीए कार्यालय की ओर से लगभग 118 निजी बसों को परमिट जारी किए गए हैं, जबकि रोडवेज और लीज मिलाकर करीब 197 बसें विभिन्न रूटों पर संचालित हो रही हैं। इनमें से कई रूटों पर सरकारी और निजी बसें बारी-बारी से चलती हैं, लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है जब निजी बसों में बुजुर्गों के कार्ड को मान्यता नहीं दी जाती। ऐसे में यात्रियों को पूरी टिकट कटवानी पड़ती है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इससे पहले छात्र व छात्राओं के बस पास बंद किए जा चुके हैं। बुजुर्ग यात्रियों के लिए सरकार की ओर से जिले में लगभग 15 हजार आधा किराया छूट कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह योजना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में शुरू की गई थी और शुरुआत में यह सुविधा रोडवेज के साथ-साथ निजी बसों में भी लागू थी। लेकिन समय के साथ निजी बस संचालकों ने इसे लागू करना बंद कर दिया। संवाद
इन रूटों पर ज्यादा निजी बसें
बुजुर्ग यात्री रामजुवारी, जमना राम, दिवान सिंह ने कहा कि कार्ड बनवाने के लिए उन्हें अटल सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन जब बस में सुविधा ही नहीं मिलती तो यह योजना बेकार साबित हो रही है। निजी बसों में भी यह कार्ड अनिवार्य रूप से मान्य किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके और सरकारी योजना का वास्तविक लाभ मिल पाए। कैथल से चीका, असंध, निसिंग, टोहाना, नगूरां, कैथल से पूंडरी, पूंडरी से कुरुक्षेत्र और राजौंद से पिहोवा जैसे रूटों पर रोजाना निजी व सरकारी बसें चलती है। इन रूटों पर बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।भीड़ के कारण कई बार बुजुर्ग बसों में चढ़ भी नहीं पाते और घंटों तक स्टॉप पर खड़े रहने को मजबूर होते हैं। बस परिचालकों से लड़ाई-झगड़े के मामले आ रहे हैं।
बॉक्स-
निजी बस यूनियन के प्रधान हरबंस ने बताया कि परिवहन विभाग से जो पैसा आता है। वह रोडवेज विभाग में जाता है। निजी बस संचालकों को कोई फायदा नहीं मिलता है। रुपये जमा करवाने का मामला अदालत में विचाराधीन है। जिस कारण निजी बसों में बुजुर्गों को आधे किराये की छूट नहीं दी जा रही है।
वर्जन-
यूनियन के साथ बातचीत चल रही है और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। बुजुर्ग यात्रियों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
गिरिश कुमार, आरटीए, कैथल