संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इस बार अब तक धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसान निराश व हताश है। बुधवार को 1509 किस्म के धान का भाव फिर से कम हो चुका है। अब यह भाव 2900 से 2725 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को परेशानी हो रही है। अनाज मंडी में 1509 किस्म के धान की 12 हजार क्विंटल के आसपास आवक हो रही है। यहां भी रेट 2400 से 2750 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब के चल रहे हैं। मंडी में फूस उठाने का काम नहीं हो रहा है, जिससे आढ़तियों से लेकर किसानों को परेशानी हो रही है।
पीआर हाइब्रिड किस्म की लगातार आवक बढ़ रही है। परेशानी की बात ये है कि सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की पीआर धान की खरीद नहीं हो रही है। यदि एकआध देरी को कोई व्यापारी खरीद भी रहा है तो वह औने-पौने दामों में ले रहा है, जिससे किसानों को नुकसान के साथ-साथ परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
कलायत में बारीक धान की खरीद शुरू, दाम 2450-2275 रुपये
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कलायत। कलायत अनाज मंडी में बारीक धान की किस्म 1509 की आवक तेजी पकड़ रही है। इसे निजी खरीदार खरीद रहे हैं। दो दिनों में कलायत अनाज मंडी में 1750 क्विंटल बारीक धान की खरीद 2450 से लेकर 2775 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से हो चुकी है।
किसान जोरा सिंह, शमशेर, रवींद्र आदी ने कहा कि इस बार बारीक धान 1509 के दामों में 900 रुपये तक की गिरावट है जो किसानों के साथ अन्याय है। 2023 में 1509 धान की खरीद 3250 से 3675 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से हुई थी।
मार्केट कमेटी सचिव अरविंद श्योकंद ने बताया कि बासमती किस्म के धान की खरीद प्राइवेट खरीदारों की ओर से की जा रही है। उन्होंने बताया की कलायत अनाज मंडी में पीआर किस्म के धान की भी आवक शुरू हो गई है पर पीआर धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू होगी। पिछले वर्ष सरकारी खरीद 26 सितंबर को शुरू हो गई थी।
कलायत के मार्केट कमेटी सचिव अरविंद श्योकंद ने बताया किबताया की अनाज मंडी में किसानों की सुविधा के लिए बिजली, पानी व बरसाती पानी के निकास आदी की सभी सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने धान की फसल को पूरी तरह से सुखा कर मंडी में लाएं ताकी बिक्री करने में उन्हें किसी किस्म की दिक्कत का सामना न करना पड़े। अनाज मंडी में सबसे बड़ी समस्या फसल डालने की आती है। सीजन जब पूरे यौवन पर होता है तो किसानों के सामने फसल डालने के लिए स्थान न होना सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। इस समस्या बारे सचिव ने बताया की विभाग की पहली प्राथमिकता पक्की मंडी में फसल डालने की रहेगी। यदि अपेक्षाकृत ज्यादा आवक के कारण मंडी में जगह की दिक्कत आती है तो वैकल्पिक मंडी में फसल डलवाई जाएगी। इससे न केवल फसल को सुरक्षित रखा जा सकेगा बल्कि सीजन के दौरान लगने वाले जाम की समस्या का भी निवारण होगा। गौरतलब है कि कलायत में लंबे समय से अतिरिक्त मंडी की सुविधा देने की मांग सरकार के समक्ष उठाई जा रही है। सरकार ने 40 एकड़ से अधिक रकबे में अतिरिक्त मंडी काटने का निर्णय पूर्व में लिया था। लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़ा मामला न्यायालय में चले जाने के कारण त्वरित तौर से भूमि एक्वायर नहीं हो पाई। इस प्रकार की पेचिदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त मंडी के निर्णय को वापिस ले लिया। हालांकि कुछ समय पहले किसानों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर डाले गए केसों को भी वापिस ले लिया था। शासन-प्रशासन और किसानों में समय पर तालमेल न होने के कारण यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।