बातचीत करते अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य
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प्रदेश के दबंग समाज में लोकतंत्र की तो चाहत है लेकिन समानता की चाहत नहीं हैं। यही कारण है कि आज भी प्रदेश में कई जगह दलित उत्पीड़न के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो 16वीं शताब्दी में होते थे। सिंह ने कहा कि कैथल सहित कई जिलों में दलित उत्पीड़न के मामले में लोगों को तुरंत न्याय मिल रहा है। लोगों में जागरूकता भी आई है। लेकिन फिर भी कई जगह उत्पीड़न जारी है। यह बातें अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने कही। वे यहां लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यमुनानगर के साभापुर में एक परिवार का इतनी बुरी तरह से सामाजिक बहिष्कार किया गया है कि उन्हें गांव से चारा व अन्य कोई जरूरत की वस्तुएं नहीं मिल रही। काफी प्रयासों के बाद इस मामले में समझौता हुआ। इस मामले में मुख्य सचिव व डीजीपी को 10 अक्तूबर को हाजिर होकर जवाब देने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि कई गांवों में कांवड़ियों को गंगाजल न चढ़ाने देने, घुड़चढ़ी ना करने देने, नारनौल के एक गांव में बारात के खाने से पूर्व बर्तन तोड़े जाने, मेवात में फेरों से पहले दबंगों द्वारा मारपीट किए जाने जैसी दर्दनाक घटनाएं हो रही हैं। इसलिए उनका हरियाणा सरकार से आग्रह है कि दलितों पर उत्पीड़न के मामलों मेें और संजीदगी दिखाएं। दलितों को आबादी के अनुसार 19 प्रतिशत बजट अलॉट किया जाए। प्रदेश में 156 (3) के तहत ज्यादा केस दर्ज करवाने पड़ रहे हैं। जबकि होना ये चाहिए कि पुलिस शिकायत आते ही केस दर्ज करे। प्रदेश में आबादी के अनुसार बजट देकर उन्हीं पर यह राशि खर्च की जाए। ऐसा ना हो इस राशि को कहीं और खर्च कर दें।
राजनेता को अपने कद के अनुसार करना चाहिए व्यवहार
गुहला के विधायक कुलवंत बाजीगर के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचे एक पत्रकार की शिकायत पर आयोग सदस्य ईश्वर सिंह ने कहा कि वैसे तो वे इस मामले में स्पष्ट किसी को लेकर कमेंट नहीं करेंगे। लेेकिन यदि कोई जनप्रतिनिधि है तो उसे अपने पद के अनुसार व्यवहार व चरित्र रखना चाहिए। उसकी भाषा या व्यवहार संयमित होना चाहिए।