सीवन। समाजसेवी प्रशांत आनंद के कार्यालय परिसर में एक दिव्य अध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमें संत छविराम दास ने श्रद्धालुओं को हृदय की पवित्रता और जीवन की सरलता का संदेश दिया। संत छविराम दास ने कहा कि जब तक हृदय में छल, अहंकार, क्रोध और तृष्णा जमी रहती है, तब तक पूजा, व्रत और तीर्थ भी केवल रस्म बनकर रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हृदय निर्मल न हो तो तीर्थ भी केवल पत्थर रह जाते हैं, क्योंकि ईश्वर बाहर नहीं, भीतर वास करते हैं। धर्म का अर्थ केवल मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं, बल्कि किसी भूखे को रोटी देना, किसी रोते को सहारा देना, किसी बेसहारे को गले लगाना भी ईश्वर की ही सेवा है। संत छविराम दास ने कहा कि प्रार्थनाएं शब्दों में नहीं, व्यवहार में झलकनी चाहिए। सेवा, सहिष्णुता और करुणा ही ऐसे दीपक हैं जो भीतर के अंधकार को मिटाते हैं। संवाद
इस अवसर पर कार्तिक आनंद, मौजी मेहता, संजय रावल, राम रतन सैनी, पूर्ण सैनी, भारत सैनी, धर्मेंद्र गांधी, चंद्रभान सैनी, प्रवेश सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद