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Kaithal News: नौकरी छोड़कर प्रदीप ने अपनाई प्राकृतिक खेती

Sun, 16 Nov 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कपिल तंवर
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कैथल। गांव जसवंती निवासी प्रदीप नंबरदार ने निजी बैंक की नौकरी छोड़कर प्राकृतिक खेती का रास्ता चुना और आज यही फैसला उनकी सबसे बड़ी कमाई का जरिया बन गया है। प्रदीप वर्तमान में 4 एकड़ जमीन पर पूरी तरह प्राकृतिक पद्धति से खेती कर रहे हैं।

गाय के गोबर से स्वयं तैयार की गई खाद और देसी तरीकों से बनाए गए कीटनाशकों से उत्पादन करते हुए वे सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती में किए उनके प्रयासों को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। उस समय सैनी कुरुक्षेत्र लोकसभा से सांसद थे। इसके अलावा हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी भी प्रदीप को सम्मानित कर चुकी है। उनकी पत्नी नीलम भी खेती में कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं, जिन्हें हिसार के कृषि मेले में सम्मानित किया गया था।
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प्रदीप ने बताया कि वे 4 एकड़ में धान, गेहूं और बिना-खाद बीज की सरसों की खेती करते हैं और इससे करीब 12 लाख रुपये की वार्षिक आय होती है। प्राकृतिक खेती में प्रति एकड़ लगभग 11–12 क्विंटल धान और 9–10 क्विंटल गेहूं का उत्पादन मिल रहा है। धान की बाजार कीमत 8,000–10,000 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं की 9,000–10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक है।

रासायनिक खेती की तुलना में उनकी फसलों की कीमत लगभग दोगुनी मिल रही है, जबकि लागत आधी से भी कम है। सरसों की फसल का तेल निकलवाकर वे सीधे बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त मुनाफा मिलता है। तेल निकालने के बाद बची खल का उपयोग वे पशुओं के चारे के रूप में करते हैं और शेष खल खेतों में डालकर भूमि को अधिक उपजाऊ बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि वे अपने खेतों में देसी कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, जिन्हें वे घर पर ही तैयार करते हैं। इन कीटनाशकों में नीम के पत्ते, लहसुन, प्याज, आक, गाय का गोबर, गोमूत्र और कुछ विशेष जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। यह मिश्रण कम लागत में तैयार हो जाता है और मिट्टी को नुकसान पहुंचाए बिना फसल की पूरी सुरक्षा
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करता है।

प्रदीप की पत्नी नीलम ने बताया कि खेती करते हुए उन्होंने कई कठिन दौर देखे हैं। पारंपरिक खेती करते समय उत्पादन घटता जा रहा था और एक समय ऐसा आया जब उन्होंने खेती छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन प्राकृतिक खेती ने उनका नजरिया और उनकी जिंदगी दोनों बदल दिए। अब वे अपने पति के साथ मिलकर प्राकृतिक तरीके से खेती करती हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय और स्थायी समाधान मिल रहा है। संवाद
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