संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में आबादी के अनुसार डॉक्टरों की संख्या का न होना भी बड़ा चुनावी मुद्दा है। जिले में पिछले करीब 10 साल में भी डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। इस समय जिले की आबादी 13 लाख से अधिक है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में आबादी के अनुसार चिकित्सक तैनात नहीं है। इनकी संख्या महज 43 है।
चिकित्सकों की यह कमी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी है। यह समस्या इस विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मु्दा रहने वाली है। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के चलते लोगों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। उन्हें महंगे दामों में करवाना पड़ रहा अपना इलाज करवाना पड़ रहा है।
महिला रोग विशेषज्ञ नहीं
नागरिक अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की भी कमी है। यहां पर रोजाना गायनी संबंधित 300 से ज्यादा ओपीडी होती है। इसलिए गर्भवतियों व अन्य महिलाओं परेशानी स्वाभाविक है। एलएमओ डॉ. हमिता गायिनी वार्ड को देख रही हैं। अस्पताल में रोजाना 10 से ज्यादा डिलीवरी केस आते हैं। बिना डॉक्टर के यहां महिलाओं को काफी परेशानी होती है। नया विद्यार्थी एमबीबीएस करने के बाद सरकारी सेवा में न आकर निजी अस्पताल या अपना अस्पताल चलाने में रुचि रख रहा है, जो इस सरकार की कमी रही है।
- रामकुमार बंसल, शहरवासी, कैथल।
सही इलाज मिलना मुश्किल
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गंभीर बीमारी वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का जल्द ही समाधान संबंधित विभाग को करवाया जाना चाहिए। - रामेश्वर फौजी नीमवाला, कैथल।
सरकार ने चिकित्सकों की कमी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। जिले के सिविल अस्पताल से लेकर सभी उप मंडल अस्पतालों व पीएचसी लेवल पर कुल 149 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से कुल 43 डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। 106 पद खाली हैं। सबसे ज्यादा समस्या कलायत व 11 पीएचसी में हैं। क्योंकि यहां तो एक भी डॉक्टर नहीं है। कई सीएचसी ऐसी हैं जिनमें सात की जरूरत है और काम दो डॉक्टरों से चलाना पड़ रहा है। डॉक्टर एक अस्पताल से दूसरे में चला जाए, तो दूसरे में मरीज भटकते हैं।
- रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस नेता, कैथल।
भाजपा सरकार के प्रयास से जिले में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करवाया गया है। उम्मीद है कि यह कॉलेज 2025 के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कोई कमी नहीं रहेगी। ऐसा नहीं है कि इस समय चिकित्सकों की कमी है। काफी संख्या में एनएचएम के तहत डॉक्टर कार्यरत हैं।
- मुनीष कठवाड़, जिलाध्यक्ष, भाजपा, कैथल।
अस्पतालों में स्वीकृत और खाली पदों पर नजर
अस्पताल
स्वीकृत
भरे पद
खाली
कैथल
55
15
40
सीएचसी सीवन
07
03
04
पीएचसी पाडला
02
01
01
पीएचसी क्योडक़
02
02
00
सीएचसी गुहला
11
4
7
पीएचसी खरकां
02
00
02
पीएचसी कांगथली
02
01
01
पीएचसी अगोंध
02
00
02
पीएचसी भागल
02
01
01
पीएचसी अरनौली
02
00
02
सीएचसी पूंडरी
07
02
05
पीएचसी पाई
02
01
01
पीएचसी हाबड़ी
02
01
01
पीएचसी मुंदड़ी
02
02
00
सीएसची राजौंद
07
02
05
पीएचसी जाखौली
02
01
01
पीएचसी करोड़ा
02
00
02
पीएचसी किठाना
02
00
02
सीएचसी कौल
07
02
05
पीएचसी टीक
02
01
01
पीएचसी ढांड
02
01
01
पीएचसी रसीना
02
00
02
पीएचसी फरल 02
00
02
सीएससी कलायत
11
0
11
पीएचसी बालू
02
00
02
पीएचसी बाता
02
00
02
पीएचसी देवबन
02
02
00
पीएचसी सजूमा
02
01
01
पीएचसी बड़सीकरी
02
00
02
यहां नहीं है
एक भी डॉक्टर
nकलायत सब डिविजनल अस्पताल
nपीएचसी खरकां
nपीएचसी अगोंध
nपीएचसी अरनौली
n पीएचसी करोड़ा
nपीएचसी किठाना
n पीएचसी रसीना
nपीएचसी फरल
nपीएचसी बालू
nपीएचसी बाता
nपीएचसी बड़सीकरी