संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित गांव बात्ता के बाबा राजपुरी डेरे में तीन दिवसीय मेला शुरू हुआ। दूध-बताशों के साथ पूजा की गई। मेले में गांव बात्ता व दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा राजपुरी व मां हिंगलाज की पूजा की।
डेरा प्रबंधक समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता प्रबंध किए थे। डेरा महंत बाबा नरेश पुरी ने बताया कि ऐतिहासिक सिद्ध बाबा राजपुरी डेरे में कार्यक्रमों का सिलसिला अष्टमी से जारी है। नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ ही तीन दिवसीय मेला की शुरूआत होती है। विजय दशमी को बाबा की ध्वजा चढ़ाने के साथ ही मेले की शुरूआत हो जाती है।
एकादशी पर देश की सांस्कृतिक विविध संस्कृतियों को एकता के सूत्र में पिरोते हुए सभी राज्यों की संस्कृतियों पर आधारित मेले का आयोजन होता है।
बाबा लदाना को पूजा के लिए जाना जाता है। वहां 24 घंटे लगातार ज्योति जलती है और तीन बार पूजा का आयोजन होता है। बात्ता गांव को भंडारे के लिए जाना जाता है। यहां डेरा में लगातार भंडारा चलता ही रहता है। बाबा राजपुरी को मां हिंगलाज सिद्ध थीं। वे हमेशा उनसे संवाद करते रहते थे। मां के प्रताप से ही बाबा राजपुरी सिद्ध हुए।
गांव बात्ता में जहां बाबा की समाधि है उसे दयोल के नाम से जाना जाता है। इसी परिसर में मेला का आयोजन होता है। प्रबंध समिति सदस्यों संजीव भारद्वाज, शिव कुमार, प्रदीप राणा, जसवंत सिंह, पवन सरपंच, साहिब सिंह व किरण पाल राणा ने बताया कि डेरा के पास 250 एकड़ भूमि थी।
समाजसेवा के हर कार्य में बाबा राजपुरी डेरा सदैव अग्रणी रहता है। गांव के सरकारी स्कूल, अस्पताल, पशु अस्पताल, वाटर सप्लाई, स्टेडियम व पावर हाउस के लिए भूमि बाबा राजपुरी डेरा की ओर से उपलब्ध करवाई गई। संजीव भारद्वाज ने कहा कि कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी भी संस्थान पर बाबा राजपुरी का नाम तक नहीं है।
दंगल में पहलवान दिखाएंगे दम
मेले में महिलाएं व बच्चे खरीदारी करते हैं। दंगल में पहलवान दमखम दिखाते हैं। तीसरे दिन सामूहिक भोज की व्यवस्था का आयोजन किया जाता है। डेरा करीब 560 वर्ष पुराना है। बाबा राजपुरी का जन्म बाबा लदाना में हुआ था। गांव बात्ता उनका गुरुस्थान है, जहां बाबा सरस्वती पुरी से उन्होंने शिक्षा व दीक्षा ग्रहण की थी।